कुत्ते के काटने के बाद 'भौंकने' लगा बच्चा! जांच में डाक्टरों को मिली ऐसी अनोखी बीमारी, जानकर उड़ जाएंगे होश, रेबीज नहीं ये है असली वजह

Edited By Purnima Singh,Updated: 27 Mar, 2026 01:13 PM

child starts barking after dog bite

सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक बच्चे के ‘कुत्ते की तरह व्यवहार’ करने वाले वीडियो ने हाल ही में लोगों को हैरान कर दिया था। अब इस पूरे मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच के बाद स्पष्ट हो गया है कि बच्चे को रेबीज नहीं है, बल्कि यह एक मानसिक स्वास्थ्य से...

वाराणसी : सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक बच्चे के ‘कुत्ते की तरह व्यवहार’ करने वाले वीडियो ने हाल ही में लोगों को हैरान कर दिया था। अब इस पूरे मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच के बाद स्पष्ट हो गया है कि बच्चे को रेबीज नहीं है, बल्कि यह एक मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या का मामला है। इलाज के बाद बच्चे की हालत में सुधार है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

मेडिकल जांच में क्या सामने आया?
डॉक्टरों की जांच और विशेषज्ञों की राय के अनुसार, बच्चे को डिसोसिएटिव कन्वर्जन डिसऑर्डर (आईसीडी F44) नामक मनोवैज्ञानिक समस्या हुई थी। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति किसी गहरे डर या मानसिक आघात के कारण असामान्य व्यवहार करने लगता है। विशेषज्ञों ने साफ किया है कि रेबीज में इंसान इस तरह ‘भौंकता’ नहीं है।

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वीडियो से फैली थी गलतफहमी
वायरल वीडियो में बच्चा अजीब हरकतें करता और भौंकने जैसी आवाज निकालता नजर आया था, जिसके बाद लोगों ने इसे रेबीज से जोड़ दिया। हालांकि जांच में यह धारणा गलत साबित हुई। इलाज के दौरान बच्चे में घबराहट और पैनिक के अलावा कोई गंभीर लक्षण नहीं पाए गए।

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कैसे शुरू हुई समस्या?
जानकारी के मुताबिक, मीरजापुर के कछवां क्षेत्र निवासी 13 वर्षीय करन को करीब पांच महीने पहले वाराणसी के हरहुआ इलाके में कुत्ते ने काट लिया था। उस समय उसे एंटी-रेबीज के कुछ टीके लगाए गए, लेकिन पूरी डोज नहीं हो सकी। इसके बाद वह सामान्य रहा, लेकिन 14 मार्च को अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी और वह असामान्य व्यवहार करने लगा।

कई अस्पतालों के बाद मिला सही इलाज
परिजनों ने उसे अलग-अलग अस्पतालों में दिखाया। पहले स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र, फिर मीरजापुर के मंडलीय अस्पताल और बाद में बीएचयू में इलाज हुआ। अंततः हरहुआ के एक सरकारी अस्पताल में उपचार के बाद उसकी हालत में सुधार आया और उसे घर भेज दिया गया। फिलहाल वह स्वस्थ हो रहा है, हालांकि हल्की चक्कर की शिकायत बनी हुई है।

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परिवार ने किया अफवाहों का खंडन 
बच्चे के पिता ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही कई बातें गलत हैं। उनके अनुसार, अधूरी वैक्सीनेशन और डर की वजह से बच्चे पर मानसिक प्रभाव पड़ा, जिससे यह स्थिति बनी।

विशेषज्ञों की सलाह
डॉक्टरों का कहना है कि इस घटना ने रेबीज को लेकर फैली गलत धारणाओं को उजागर किया है। मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं भी शारीरिक लक्षणों के रूप में सामने आ सकती हैं, इसलिए ऐसे मामलों को गंभीरता से लेना जरूरी है।

समाज के लिए सीख
यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना शारीरिक स्वास्थ्य। अधूरी जानकारी और अफवाहें नुकसान पहुंचा सकती हैं। समय पर सही इलाज और विशेषज्ञ की सलाह से स्थिति सुधर सकती है। फिलहाल बच्चा घर पर है और धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।


 

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