OBC आयोग की रिपोर्ट पर तय होगा पंचायत चुनाव में सीटों पर आरक्षण, टल सकता है यूपी पंचायत चुनाव!

Edited By Ramkesh,Updated: 13 Feb, 2026 02:54 PM

up panchayat elections may be postponed

उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) और जिला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल मई-2026 के पहले सप्ताह में समाप्त रहा है। ऐसे में चुनाव को लेकर प्रदेश के हर गली मुहल्ले में चर्चा हो रही है, लेकिन सवाल यह है कि...

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) और जिला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल मई-2026 के पहले सप्ताह में समाप्त रहा है। ऐसे में चुनाव को लेकर प्रदेश के हर गली मुहल्ले में चर्चा हो रही है, लेकिन सवाल यह है कि क्या चुवान समय पर हो पाएगा?

ओबीसी कमीशन का गठन किया जाएगा
दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच को अवगत कराया है कि आगामी पंचायत चुनाव से पूर्व प्रदेश में एक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग (डेडिकेटेड ओबीसी कमीशन) का गठन किया जाएगा।  इस मामले की सुनवाई जस्टिस राजन राय और जस्टिस अवधेश चौधरी की पीठ कर रही थी। मामला उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें मौजूदा पिछड़ा वर्ग आयोग के अधिकारों को चुनौती दी गई थी। सरकार ने अदालत में स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव में सीटों का आरक्षण नए समर्पित आयोग की रिपोटर् के आधार पर ही तय किया जाएगा। यह कदम उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में उठाया जा रहा है, जिसमें स्थानीय निकाय चुनाव से पहले समर्पित आयोग का गठन अनिवार्य बताया गया है।

ओबीसी आयोग का कार्यकाल अक्टूबर 2026 तक बढ़ा
हालांकि वर्तमान ओबीसी आयोग का कार्यकाल अक्टूबर 2025 में समाप्त हो चुका था। सरकार ने उसका कार्यकाल अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दिया, लेकिन उसके पास समर्पित आयोग जैसी संवैधानिक शक्तियां नहीं होने को लेकर सवाल खड़े हुए थे। अब प्रस्तावित समर्पित आयोग पिछड़े वर्ग का‘रैपिड सर्वे'करेगा। इस सर्वे के माध्यम से प्रदेश में पिछड़ों की वास्तविक आबादी का आकलन किया जाएगा और उसी आधार पर सीटों का आरक्षण निर्धारित होगा। ऐसे में समय लगना तय है।

ओबीसी आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट की व्यवस्था जरूरी  सुप्रीम कोर्ट
गौरतलब है कि सुप्रीम कोटर् ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थानीय निकाय या पंचायत चुनाव से पहले तीन वर्ष के कार्यकाल वाला समर्पित आयोग या कमीशन होना आवश्यक है। सरकार के इस निर्णय से संकेत मिलते हैं कि पंचायत चुनाव की तिथियों की घोषणा समर्पित आयोग की अंतिम रिपोटर् आने के बाद ही संभव होगी। सुप्रीम कोर्ट के साफ निर्देश हैं कि स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट की व्यवस्था जरूरी है इसके लिए समर्पित आयोग का गठन और वास्तविक आबादी का रैपिड सर्वे (समकालीन) और कुल आरक्षण 50 फीसदी की सीमा के भीतर रहे। ऐसे में ओबीसी आयोग के गठन के बाद आरक्षण की प्रक्रिया शुरू होगी। रिपोर्ट के बाद चुनाव की तारीख का ऐलान हो सकता है।  
 

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