Edited By Pooja Gill,Updated: 05 Feb, 2026 02:20 PM

लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर चुनाव आयोग और भाजपा पर निशाना साधा है। अखिलेश यादव ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर कड़ा बयान देते हुए कहा कि आज हालात ऐसे बना...
लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर चुनाव आयोग और भाजपा पर निशाना साधा है। अखिलेश यादव ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर कड़ा बयान देते हुए कहा कि आज हालात ऐसे बना दिए गए हैं, मानो भारत निर्वाचन आयोग और भाजपा के बीच कोई फर्फ ही न रह गया हो। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब तो ऐसा लगता है जैसे चुनाव आयोग का झंडा भाजपाइयों को पीठासीन अधिकारी बनाने के साथ उनके घरों पर लगा दिया जाए और बूथ भी वहीं बना दिए जाएं।
ठगों का रिश्ता सिर्फ ठगी से होता हैः अखिलेश
सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव ने पूछा 'क्या चुनाव आयोग ने भाजपा को ठेके पर अपना काम दे दिया है या भाजपा ने चुनाव आयोग को संविदा पर रख लिया है।' प्रशासनिक पर्यायवाची कोश में ‘चुनाव आयोग' को ‘भाजपा' के पर्यायवाची के रूप में जोड़ देना चाहिए। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि मौजूदा शासनकाल में सरेआम वोट काटने-बढ़ाने जैसी गतिविधियां हो रही हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाएं आंख मूंदे बैठी हैं। उन्होंने कहा कि आज जो लोग वोट छीन रहे हैं, वे कल जनता के बाकी अधिकार भी छीनेंगे और इसमें भाजपा समर्थक भी सुरक्षित नहीं रहेंगे। उनका कहना था कि 'ठगों का रिश्ता सिर्फ ठगी से होता है,' और यही वजह है कि आम लोगों का भरोसा लगातार टूट रहा है।
जो पीड़ित, वही पीडीएः अखिलेश यादव
दूसरी पोस्ट में उन्होंने ‘पीडीए' को पीड़ा से जुड़ी एक साझा भावना बताते हुए कहा 'जो पीड़ित, वही पीडीए।' अखिलेश यादव के मुताबिक अब पीडीए समाज एकजुट हो रहा है और उत्पीड़न सहने के बजाय खुलकर अपनी बात कह रहा है। उन्होंने दावा किया कि अब तक लोगों ने दूसरों की सरकारें बनाईं, लेकिन आगे चलकर अपनी‘पीडीए सरकार'बनाकर सामाजिक न्याय का राज स्थापित किया जाएगा, जहां सभी को बराबर सम्मान, तरक्की के समान अवसर और साझा खुशहाली मिलेगी। सपा प्रमुख ने कहा कि वर्षों से समाज के बड़े हिस्से को बांटकर राजनीति करने वालों की नकारात्मक रणनीतियां अब दम तोड़ रही हैं। भ्रष्टाचार और अत्याचार से त्रस्त हर समाज के 'अच्छे लोग' सकारात्मक, प्रगतिशील और सौहार्दपूर्ण पीडीए के विचार से जुड़ते जा रहे हैं। उनके अनुसार, 'पीडीए अब सिफर् एक राजनीतिक अवधारणा नहीं, बल्कि उम्मीद का नया नाम बन चुका है।'