बाबरी मस्जिद निर्माण पर गरमाई सियासत: TMC के पूर्व विधायक हुमायूं कबीर पर केस दर्ज, जानें चुनाव में किसे होगा लाभ

Edited By Ramkesh,Updated: 12 Feb, 2026 03:26 PM

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तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर बहुचर्चित मस्जिद का निर्माण कार्य शुरू किया। लेकिन इसे लेकर सियासत तेज हो गई है। बीजेपी और हिंदू संगठन बाबर के नाम का...

यूपी डेस्क: तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर बहुचर्चित मस्जिद का निर्माण कार्य शुरू किया। लेकिन इसे लेकर सियासत तेज हो गई है। बीजेपी और हिंदू संगठन बाबर के नाम का विरोध कर रहे हैं। BJP के नेता सुरेंद्र अधिकारी ने कहा कि हिंदू मंदिर का निर्माण कर सकता है, मुस्लिम मस्जिद का निर्माण करा सकता है, लेकिन बाबरी के नाम से मस्जिद नहीं बन सकती। उन्होंने कहा कि बाबर एक विदेशी आक्रांता था उसने देश को लूटा ऐसे लोगों के नाम पर देश में मस्जिद नहीं बनने दें। ममता को लेकर भी खूब खरी खोटी सुनाई।

सांप्रदायिक तनाव भड़काने का आरोप
एक संगठन ने कोलकाता के मैदान पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ कथित तौर पर सांप्रदायिक तनाव भड़काने के आरोप में गिरफ्तारी की मांग करते हुए एफआईआर दर्ज कराई। संगठन की ओर से हजरत मोहम्मद परवेज सिद्दीकी ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि 'बाबरी मस्जिद' के नाम पर राज्य में हिंसा का माहौल भड़काया जा रहा है। सिद्दीकी ने कहा, "मस्जिद का निर्माण किसी और नाम से किया जा सकता था, लेकिन बाबरी मस्जिद के नाम से नहीं।

मस्जिद का निर्माण दो साल के भीतर पूरा हो
हाल ही में जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी) का गठन करने वाले कबीर ने घोषणा की कि बेलडांगा के रेजिनगर में इस मस्जिद का निर्माण दो साल के भीतर पूरा हो जाएगा और इसकी लागत लगभग 50-55 करोड़ रुपये आयेगी। यह मस्जिद 11 एकड़ जमीन पर बनाई जा रही है और इसमें लगभग 12,000 लोगों के नमाज अदा करने की क्षमता होगी। धार्मिक नेताओं एवं सैकड़ों स्थानीय लोगों के उत्साह के बीच, निर्माण श्रमिकों ने दिन में इमारत के लिए ईंटे रखने का समारोह शुरू किया।

मेरा प्रयास अल्लाह को प्रसन्न करना
कबीर ने कहा कि कई पक्षों के विरोध के बावजूद मस्जिद का निर्माण कार्य निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चल रहा है। निर्माण कार्य में भागीदारी दर्शाने के लिए कई समर्थक अपने सिर पर ईंटें ढोते हुए देखे गए। जेयूपी प्रमुख ने कहा, "विरोध करने वालों से मैं कहना चाहूंगा कि वे हट जाएं। लोगों को अपने-अपने धर्मों का पालन करने तथा मंदिर, गिरजाघर या जो चाहें बनाने की पूरी आजादी है। मैं इस्लाम के नाम पर किसी का विरोध नहीं करूंगा। मेरा प्रयास अल्लाह को प्रसन्न करना और अपनी धार्मिक आस्था को निभाना है, किसी पर कुछ थोपना नहीं।" उन्होंने कहा,''इस मस्जिद के निर्माण को रोकने वाली धरती पर कोई ताकत नहीं है।

निर्माण करने में लगभग लगेगा 50-55 करोड़ रुपये
अल्लाह की कृपा से हम दो साल के भीतर इसका निर्माण पूरा कर लेंगे। इसे बनाने में 50-55 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।'' हालांकि कबीर ने घोषणा की कि बोर्ड परीक्षाएं होने के चलते वह फिलहाल अपनी 'बाबरी यात्रा' - नदिया के पलाशी से उत्तर दिनाजपुर जिले के इटाहार तक 235 किलोमीटर की रैली - को स्थगित रखेंगे। उन्होंने कहा कि इसके बजाय, वह बृहस्पतिवार को पलाशी से बेलडांगा तक 22 किलोमीटर की पदयात्रा करेंगे। कबीर ने पिछले साल छह दिसंबर को अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक मस्जिद की नींव रखी थी। बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी के मौके पर उठाए गए इस कदम से पश्चिम बंगाल में तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आयीं।

पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में हुमायूं कबीर T MC से किए गए हैं बाहर
खबरों के मुताबिक उन्होंने पहले दो दिनों में ही 2.85 करोड़ रुपये से अधिक का चंदा जुटाया था। भरतपुर से तृणमूल विधायक को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में पार्टी से निलंबित कर दिया गया था जिसके बाद उन्होंने अपनी खुद की पार्टी बनाई। कबीर ने यह भी घोषणा की कि उनकी पार्टी राज्य के 294 निर्वाचन क्षेत्रों में से 135 पर प्रत्याशी खड़ा कर आगामी विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों को टक्कर देगी।

'मुस्लिम वोट बैंक  पर सब की नजर
कबीर ने अब तक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम समेत कई विपक्षी दलों के साथ सीट बंटवारे पर प्रारंभिक बातचीत की है, लेकिन अभी तक किसी के साथ औपचारिक गठबंधन नहीं किया है। भाजपा ने जेयूपी को तृणमूल कांग्रेस की 'बी-टीम' बताया है। तृणमूल कांग्रेस ने इस आरोप को खारिज कर दिया है। आज के घटनाक्रम पर भाजपा नेता दिलीप घोष ने कहा कि यह निर्माण 'मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने' के उद्देश्य से किया जा रहा है लेकिन बंगाल के मतदाताओं पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ेगा।

बाबरी मस्जिद का पुनर्निर्माण 'कयामत' तक नहीं होगा - सीएम योगी का ऐलान  
उन्होंने आरोप लगाया, ''हुमायूं कबीर जिस कारण से यह मस्जिद बनवा रहे हैं, उसी कारण से ममता बनर्जी राज्य भर में मंदिर बनवा रही हैं, यानी सांप्रदायिक आधार पर मतदाताओं को एकजुट करने के लिए। इसका मतदाताओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि लोगों को विकास की जरूरत है।'' मंगलवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि बाबरी मस्जिद का पुनर्निर्माण 'कयामत' (कयामत के दिन) तक कभी नहीं होगा।

पश्चिम बंगाल के आम चुनाव में ममता बनर्जी को हो सकता है नुकसान
पश्चिम बंगाल में 294 विधानसभा के लिए चुनाव मार्च–अप्रैल 2026 के दौरान कराए जाने की उम्मीद है, हालांकि आधिकारिक तारीखें अभी तक घोषित नहीं हुई हैं। मौजूदा 17वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त होना तय है। इसी वजह से नए विधानसभा चुनाव मार्च–अप्रैल 2026 के बीच कराए जाने की संभावना है, ताकि 7 मई से पहले नई विधानसभा का गठन हो सके। ऐसे में इस मुद्दे को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियां अपने वोंट बैंक को मजबूत करने की कोशिस में हैं TMC का मुख्य वोट बैंक अल्पसंख्यक (मुस्लिम) + ग्रामीण गरीब + महिला वोटर हैं। यदि मस्जिद के मुद्दे को लेकर मुस्लिम एक जुट हुआ तो ममता को चुकसान हो सकता है।

मुस्लिम वोटों में लग सकती है सेंध
मुस्लिम अवादी खासकर सीमावर्ती जिलों में है ऐसे में अगर पार्टी या उसके नेता बाबरी मस्जिद के पक्ष/विरोध में ऐसा बयान देते हैं जिसे मुस्लिम समुदाय अपमान या दूरी के रूप में देखे, तो पार्टी को TMC को नुकसान और बीजपे को फायदा हो सकता है।  लेकिन ममता बनर्जी की राजनीति अब तक धार्मिक मुद्दों से ज़्यादा “वेलफेयर और पहचान” पर टिकी रही है, इसलिए एक-दो बयानों से बड़ा नुकसान जरूरी नहीं।

राष्ट्रीय स्तर पर असर
बाबरी मस्जिद जैसे मुद्दे पर बयान देने से TMC को हिंदुत्व राजनीति के समर्थक वोट नहीं मिलते, और अल्पसंख्यक वोट नाराज़ भी हो सकते हैं।
यानी राष्ट्रीय विस्तार की कोशिशों को झटका लग सकता है।

BJP को मिल सकता है फायदा
ऐसे बयान BJP के लिए नैरेटिव बनाने का मौका बन जाते हैं। BJP इसे “तुष्टिकरण बनाम राष्ट्र” या “हिंदू बनाम अन्य” फ्रेम में ले जाती है, जिससे ध्रुवीकरण बढ़ता है—और इसका सीधा फायदा अक्सर BJP को मिलता है।

सामाजिक योजनाएं
ममता बनर्जी की व्यक्तिगत छवि, पर ज्यादा भरोसा करता है, न कि बाबरी जैसे पुराने मुद्दों पर। अगर नेतृत्व तुरंत डैमेज कंट्रोल कर ले, तो असर सीमित रह सकता है। हालांकि विधानसभा चुनाव से पहले मस्जिद को लेकर सियासत तेज है अब देखना होगा कि इससे किस पार्टी को फायदा मिलता है और किसे इसका नुकसान उठाना पड़ता है।

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