Edited By Anil Kapoor,Updated: 05 Apr, 2026 03:08 PM

Meerut News: आमतौर पर जब कोई बेटी शादी के बाद ससुराल से वापस आती है, तो समाज उसे असफलता की नजर से देखता है। लेकिन मेरठ के शास्त्री नगर में एक पिता ने इस रूढ़िवादी सोच को जड़ से उखाड़ फेंका। एक रिटायर्ड जज ने तलाक के बाद घर लौट रही अपनी बेटी का...
Meerut News: आमतौर पर जब कोई बेटी शादी के बाद ससुराल से वापस आती है, तो समाज उसे असफलता की नजर से देखता है। लेकिन मेरठ के शास्त्री नगर में एक पिता ने इस रूढ़िवादी सोच को जड़ से उखाड़ फेंका। एक रिटायर्ड जज ने तलाक के बाद घर लौट रही अपनी बेटी का स्वागत किसी जश्न की तरह किया। फूलों की बारिश, ढोल-नगाड़े और मिठाई के साथ बेटी का ऐसा स्वागत हुआ, जिसे देख हर किसी की आंखें नम हो गईं।
6 साल का संघर्ष और अब आजादी का जश्न
शास्त्री नगर निवासी रिटायर्ड जज की बेटी प्रतीक्षा की शादी साल 2018 में शाहजहांपुर के मेजर गौरव अग्निहोत्री के साथ बड़े धूमधाम से हुई थी। शादी के बाद दोनों का एक बेटा भी हुआ, लेकिन कुछ समय बाद ही रिश्ते में कड़वाहट आने लगी। प्रतीक्षा को ससुराल में मानसिक और भावनात्मक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। मामला कोर्ट तक पहुंचा और सालों की कानूनी लड़ाई के बाद 4 अप्रैल 2026 को अदालत ने तलाक को मंजूरी दे दी। जहां समाज ऐसी स्थिति में मायूसी मनाता है, वहीं इस पिता ने अपनी बेटी के आत्मसम्मान को सर्वोपरि रखा। उन्होंने तय किया कि उनकी बेटी 'दुखी' होकर नहीं, बल्कि एक विजेता की तरह घर लौटेगी।
'I Love My Bitiya': टी-शर्ट पर लिखा प्यार का संदेश
जैसे ही प्रतीक्षा घर पहुंची, माहौल किसी उत्सव जैसा था। ढोल-नगाड़े बज रहे थे और रिश्तेदारों ने नाचते-गाते हुए प्रतीक्षा पर फूलों की बारिश की। पिता ने खुद एक सफेद टी-शर्ट पहन रखी थी, जिस पर बड़े अक्षरों में लिखा था— 'I Love My Bitiya'। उन्होंने अपनी बेटी को गले लगाया और उसे यकीन दिलाया कि वह कभी अकेली नहीं है।
समाज को दिया कड़ा संदेश
इस मौके पर भावुक पिता ने कहा कि बेटी कभी बोझ नहीं होती। अगर वह अपनी शादी में खुश नहीं है या प्रताड़ित हो रही है, तो उसे जबरदस्ती वहां नहीं रखना चाहिए। मेरी बेटी ने 6 साल बहुत कुछ सहा, लेकिन अब वह आजाद है। हम उसकी नई जिंदगी की शुरुआत का स्वागत कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई नई सोच
इस अनोखे स्वागत का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इस पिता के हौसले और सोच की जमकर तारीफ कर रहे हैं। नेटीजंस का कहना है कि अगर हर पिता अपनी बेटी के साथ इस तरह खड़ा हो जाए, तो बेटियों को कभी किसी के जुल्म से डर नहीं लगेगा। प्रतीक्षा की कहानी अब एक अंत की नहीं, बल्कि आत्मसम्मान के साथ एक नई शुरुआत की कहानी बन गई है।