Good News! अब 5 साल नहीं, सिर्फ 1 साल में ही ग्रेच्युटी के हकदार होंगे आप, नए लेबर लॉ से नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत

Edited By Anil Kapoor,Updated: 04 Apr, 2026 01:55 PM

good news now you will be entitled to gratuity in just one year not five

National Desk: देश के करोड़ों कर्मचारियों के लिए 1 अप्रैल 2026 से एक ऐतिहासिक बदलाव लागू हो गया है। केंद्र सरकार के नए लेबर कोड (New Labour Code) ने कंपनियों के लिए कड़े नियम तय कर दिए हैं। अब अगर आप नौकरी छोड़ते हैं या आपको...

UP Desk: देश के करोड़ों कर्मचारियों के लिए 1 अप्रैल 2026 से एक ऐतिहासिक बदलाव लागू हो गया है। केंद्र सरकार के नए लेबर कोड (New Labour Code) ने कंपनियों के लिए कड़े नियम तय कर दिए हैं। अब अगर आप नौकरी छोड़ते हैं या आपको निकाला जाता है, तो कंपनी को आपका पूरा हिसाब (Full and Final Settlement) सिर्फ 2 वर्किंग डेज के अंदर करना होगा।

क्या है नया नियम? 
अभी तक नियम यह था कि इस्तीफा देने या नौकरी से निकाले जाने के बाद कर्मचारियों को अपना बकाया पैसा पाने के लिए 45 से 90 दिनों तक का लंबा इंतजार करना पड़ता था। इससे घर का किराया देने और ईएमआई (EMI) चुकाने में भारी दिक्कत आती थी। लेकिन अब इस्तीफा देने, बर्खास्त होने या कंपनी बंद होने की स्थिति में, कंपनी को अगले 2 वर्किंग डेज के भीतर सारा भुगतान करना अनिवार्य है। पहले जो प्रक्रिया 1 से 3 महीने लेती थी, वह अब महज 48 घंटों में पूरी होगी।

किसे कहते हैं फुल एंड फाइनल सेटलमेंट?
फुल एंड फाइनल सेटलमेंट का मतलब सिर्फ आखिरी महीने की सैलरी नहीं है। इसमें वो तमाम पैसे शामिल होते हैं जो कंपनी को आपको देने हैं। आखिरी वर्किंग डे तक का पूरा वेतन। आपकी बची हुई छुट्टियों का पैसा। परफॉर्मेंस के आधार पर मिलने वाला बकाया बोनस। यात्रा या ऑफिस से जुड़े अन्य खर्चों का भुगतान। टैक्स, एडवांस सैलरी या कंपनी का सामान वापस न करने पर होने वाली कानूनी कटौती।

ग्रेच्युटी के नियमों में भी बड़ा बदलाव
नए लेबर कोड में ग्रेच्युटी (Gratuity) को लेकर सबसे राहत भरी खबर आई है। पहले ग्रेच्युटी पाने के लिए किसी कंपनी में लगातार 5 साल काम करना जरूरी था। अब इसे घटाकर सिर्फ 1 साल कर दिया गया है। कंपनी को ग्रेच्युटी का पैसा कर्मचारी को 30 दिनों के भीतर देना होगा।

इन शर्तों का रखें ध्यान
नियमों के अनुसार, ज्यादातर मामलों में 2 दिन का नियम लागू होगा, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों या कंपनी की इंटरनल पॉलिसी के तहत कुछ भुगतान अभी भी 1 महीने तक खिंच सकते हैं। हालांकि, मुख्य सैलरी और अलाउंस के लिए 2 दिन की समय सीमा ही सर्वोपरि रहेगी। सरकार के इस कदम से लेबर मार्केट में पारदर्शिता आएगी और कर्मचारियों का शोषण बंद होगा। अब कंपनियों को अपनी एचआर (HR) और पेरोल (Payroll) व्यवस्था को और अधिक तेज करना होगा।

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