Edited By Anil Kapoor,Updated: 04 Apr, 2026 07:45 AM

Mahoba News: उत्तर प्रदेश के महोबा जिले से एक रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है। जहां के कबरई थाना क्षेत्र के मकरबई गांव में एक परिवार की खुशियां उस वक्त मातम में बदल गईं, जब बेटी की शादी का पहला कार्ड भगवान को चढ़ाने जा रही...
Mahoba News: उत्तर प्रदेश के महोबा जिले से एक रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है। जहां के कबरई थाना क्षेत्र के मकरबई गांव में एक परिवार की खुशियां उस वक्त मातम में बदल गईं, जब बेटी की शादी का पहला कार्ड भगवान को चढ़ाने जा रही मां की ट्रेन की टक्कर से मौत हो गई।
क्या है पूरा मामला?
मकरबई गांव की रहने वाली 42 वर्षीय ऊषा सिंह की 21 वर्षीय बेटी सपना की शादी आगामी 28 अप्रैल को होनी तय हुई थी। घर में शादी की तैयारियां जोरों पर थीं और निमंत्रण पत्र (Wedding Cards) भी छपकर आ चुके थे। बुंदेलखंड की परंपरा के अनुसार, परिवार का पहला कार्ड मध्य प्रदेश के ओरछा स्थित रामराजा सरकार के चरणों में अर्पित किया जाना था। इसी परंपरा को निभाने के लिए ऊषा सिंह अपने 15 वर्षीय बेटे नागेंद्र के साथ बाइक से ओरछा के लिए निकली थीं।
खराब रास्ते ने छीन ली जान
ग्रामीणों और परिजनों के अनुसार, गांव का रेलवे अंडरब्रिज (Underpass) बेहद जर्जर स्थिति में है। ट्रकों के भारी दबाव और ऊबड़-खाबड़ रास्ते के कारण बाइक से वहां से निकलना बहुत मुश्किल था। हादसे के वक्त ऊषा सिंह ने सुरक्षा को देखते हुए बेटे नागेंद्र से बाइक अकेले निकालने को कहा। वह खुद पैदल ही रेलवे ट्रैक पार करने लगीं। तभी अचानक तेज रफ्तार झांसी-बांदा मेमू ट्रेन आ गई और ऊषा सिंह उसकी चपेट में आ गईं। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ऊषा सिंह की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
प्रशासन के खिलाफ ग्रामीणों में आक्रोश
इस घटना के बाद से पूरे गांव में शोक की लहर है और लोगों में प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी है। मृतका के देवर पिंटू सिंह और ग्रामीण सुरेंद्रपाल सिंह का कहना है कि अंडरब्रिज की बदहाली के कारण लोग जान जोखिम में डालकर ट्रैक पार करने को मजबूर हैं। यहां आए दिन हादसे होते रहते हैं, लेकिन प्रशासन सुध नहीं ले रहा है। अगर रास्ता सही होता, तो ऊषा सिंह को पैदल ट्रैक पार करने की जरूरत नहीं पड़ती।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
ऊषा सिंह अपने पीछे 3 बच्चे—बेटी सपना (21), बेटा मानवेंद्र (18) और छोटा बेटा नागेंद्र (15) छोड़ गई हैं। जिस घर में शहनाइयां बजने वाली थीं, वहां अब केवल चीख-पुकार सुनाई दे रही है। शादी की खुशियां पल भर में खत्म हो गईं और पूरा परिवार गहरे सदमे में है।