Edited By Mamta Yadav,Updated: 15 Sep, 2025 10:09 PM

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर अपने चुटीले अंदाज़ में सियासी तंज कसते हुए सुर्खियां बटोरी हैं। इस बार निशाने पर उनके पूर्व सहयोगी और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर रहे।
Lucknow News: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर अपने चुटीले अंदाज़ में सियासी तंज कसते हुए सुर्खियां बटोरी हैं। इस बार निशाने पर उनके पूर्व सहयोगी और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर रहे। बता दें कि सोमवार को लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान जब पत्रकारों ने अखिलेश यादव से पूछा कि आज ओम प्रकाश राजभर का जन्मदिन है, क्या आप कुछ कहेंगे? तो उन्होंने व्यंग्यपूर्ण लहजे में जवाब दिया, "मैं क्या करूं? जन्मदिन उनका है, तो मैं क्या करूं इसके लिए?"
राजभर की गिरती राजनीतिक अहमियत पर कटाक्ष
बात यहीं नहीं रुकी। अखिलेश यादव ने मुस्कराते हुए कहा, "100 रुपये से काम चलता हो तो भिजवा दें। हम तो 100 रुपये ही देते हैं, चाहे जिनका भी जन्मदिन हो।" इसके बाद उन्होंने पत्रकारों को सलाह दी, "ऐसे बहस मत करो। किसी की वैल्यू मत बढ़ाओ।" अखिलेश का यह बयान जहां सपा कार्यालय में मौजूद कार्यकर्ताओं के बीच हंसी का कारण बना, वहीं राजनीतिक हलकों में इसे राजभर की गिरती राजनीतिक अहमियत पर कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है।
पृष्ठभूमि: रिश्तों में आई दूरी
साल 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और सुभासपा के बीच गठबंधन हुआ था। इस गठबंधन के तहत राजभर को टिकट दिए गए और उन्होंने अखिलेश यादव के पक्ष में प्रचार भी किया। लेकिन चुनावी नतीजों में बहुमत न मिलने के बाद दोनों दलों के रिश्तों में खटास आ गई और राजभर ने दोबारा एनडीए (BJP) का दामन थाम लिया। अब अखिलेश यादव उनके प्रति अपनी दूरी और नाराजगी को सार्वजनिक मंच से भी जाहिर करने लगे हैं।
'100 रुपये वाली परंपरा'
अखिलेश यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि वे जन्मदिन के मौके पर उपहार में सिर्फ 100 रुपये ही देते हैं। यह बात उन्होंने पहले भी सांसद इकरा हसन और प्रिया सरोज के जन्मदिन के अवसर पर साबित की थी। दोनों ही मौकों पर उन्होंने उपहार स्वरूप 100 रुपये भेंट किए थे। अब यही बात उन्होंने ओम प्रकाश राजभर पर भी लागू की, जो यह दर्शाता है कि सपा प्रमुख अब उन्हें राजनीतिक रूप से महत्व नहीं देना चाहते।