Edited By Pooja Gill,Updated: 24 Feb, 2026 12:50 PM

UP Politics: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अब सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपने बागी विधायकों की वापसी...
UP Politics: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अब सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपने बागी विधायकों की वापसी को लेकर सॉफ्ट स्टैंड अपनाया है। सूत्रों के मुताबिक, जो विधायक जिस परिस्थिति में पार्टी से अलग हुए थे, वे उसी रास्ते से वापसी कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए उन्हें पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा और समर्पण साबित करना होगा।
सपा में वापसी की राह नहीं है बंदः सूत्र
सूत्रों ने बताया कि, 'पार्टी के भीतर यह चर्चा तेज है कि सत्ताधारी दल में अपेक्षित महत्व न मिलने से कुछ बागी विधायक असहज हैं और उन्होंने दोबारा संपर्क साधना शुरू किया है। सूत्रों का कहना है कि सपा नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि वापसी की राह बंद नहीं है, लेकिन इसके लिए व्यवहारिक प्रमाण देना होगा' आगामी राज्यसभा चुनाव को बागी विधायकों की वापसी की कसौटी माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों पर 25 नवंबर को मतदान प्रस्तावित है।
कैसे मिल सकती है वापसी?
माना जा रहा है कि यदि बागी विधायक सपा प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान करते हैं तो उनके लिए पार्टी में पुन: एंट्री का रास्ता आसान हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, समाजवादी पार्टी की ओर से किसी लिखित माफीनामे की शर्त नहीं रखी गई है, बल्कि राजनीतिक आचरण को ही निष्ठा की असली परीक्षा माना जाएगा। फरवरी 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान सपा के कुछ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी, जिसके बाद पार्टी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कई नेताओं को निष्कासित कर दिया था। उस चुनाव में भाजपा के आठ और सपा के दो प्रत्याशी विजयी हुए थे।
अखिलेश यादव दे चुके संकेत
अब बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच सपा नेतृत्व रणनीतिक रूप से संगठन को मजबूत करने और असंतुष्ट नेताओं को साधने की दिशा में कदम बढ़ाता दिख रहा है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि संगठन सर्वोपरि है और जो भी पार्टी की विचारधारा और अनुशासन को स्वीकार करेगा, उसके लिए दरवाजे बंद नहीं हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव से पहले सपा का यह कदम विपक्षी एकजुटता और संगठनात्मक मजबूती की द्दष्टि से अहम साबित हो सकता है।