Edited By Tamanna Bhardwaj,Updated: 18 Nov, 2021 02:51 PM

एनसीआर में प्रदूषित हवा और स्मॉग के कारण शहर की सांसें थमने लगी है। इसके साथ ही सांस और अस्थमा के मरीजों की अस्पतालों में लाइनें लगने लगी हैं। ऐसे में नोएडा प्राधिकरण ने भेल के साथ मिलकर प्रदूषण को थामने के लिए प्रदेश का पहला एयर पॉल्यूशन कंट्रोल...
नोएडा: एनसीआर में प्रदूषित हवा और स्मॉग के कारण शहर की सांसें थमने लगी है। इसके साथ ही सांस और अस्थमा के मरीजों की अस्पतालों में लाइनें लगने लगी हैं। ऐसे में नोएडा प्राधिकरण ने भेल के साथ मिलकर प्रदूषण को थामने के लिए प्रदेश का पहला एयर पॉल्यूशन कंट्रोल टावर स्थापित कर लोगों को राहत देने का काम किया है। इस एयर पोल्यूशन कंट्रोल टावर का उद्घाटन केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री महेंद्र नाथ पांडे और राज्यमंत्री विद्युत और श्रीकृष्ण पाल गुर्जर ने किया। इस मौके पर भारी उद्योग मंत्री महेंद्र नाथ पांडे ने कहा ये हमारे भारी उद्योग इकाई भेल के द्वारा शुरु किया गया है। ये नोएडा और आसपास के लोगों के लिये कारगर पहल है।

एक किमी रेडियस की हवा को करेगा साफ
बता दें कि हाल ही में BHEL ने पायलट प्रोजेक्ट के रूप में अपने तरह का यह पहला एपीसीटी नोएडा प्राधिकरण के सहयोग से नोएडा में स्थापित किया है। यह टावर लगभग एक वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में हवा को शुद्ध करेगा। डीएनडी और नोएडा एक्सप्रेसवे पर यातायात अत्यधिक होने के कारण इस क्षेत्र में उत्पन्न अधिकतम प्रदूषण को देखते हुए इस टावर की स्थापना डीएनडी फ्लाईवे और स्लिप रोड के बीचों-बीच स्थित साइट पर की गई है।

...तो ऐसे काम करेगा एयर पॉल्यूशन कंट्रोल टावर
गौरतलब है कि नोएडा एनसीआर में प्रत्येक साल ठंड बढ़ते वायु की गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक गिर जाती है। जिसके कारण जनमानस को अत्यधिक असुविधा का सामना करना पड़ता है। सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर, सल्फर डाइऑक्साइड , नाइट्रोजन के ऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड इत्यादि मिलकर वायु को प्रदूषित करते हैं। इस समस्या के निराकरण के लिए वायु प्रदूषण नियंत्रण टावर की स्थापना जरूरी है। वायु प्रदूषण नियंत्रण टावर बड़े पैमाने पर हवा को साफ करने के लिए डिजाइन की गई संरचना है। प्रदूषित हवा के टावर में प्रवेश करने के बाद इसे वातावरण में पुनः छोड़ने से पहले कई परतों द्वारा साफ किया जाता है। वायु प्रदूषण नियंत्रण टावर को बड़े पैमाने पर वायु शोधक के रूप में उपयोग किया जा सकेगा।
टॉवर पर आएगा इतना खर्च?
यह टावर भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड यानि भेल के हरिद्वार प्लांट में तैयार किया गया है। टावर को भेल ने स्वयं के खर्चे पर स्थापित किया है। वायु प्रदूषण नियंत्रण टावर के संचालन में हर साल करीब 37 लाख रुपये का खर्च आने का अनुमान है, जिसमें उपकरणों के अनुरक्षण में 15 लाख रुपए और प्रतिवर्ष विद्युत आपूर्ति पर 22 लाख रुपए का खर्च आएगा। नोएडा प्राधिकरण इस खर्चे का 50 फीसद वहन करेगा।