UP Election 2022: वाराणसी में चुनावी जंग में सहयोगी दलों की भूमिका अहम, OP राजभर और अनुप्रिया के ताकत की परीक्षा

Edited By Mamta Yadav, Updated: 04 Mar, 2022 08:45 PM

up election the role of allies in the election battle in varanasi is important

भाजपा गठबंधन और समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन के सहयोगी दलों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी निर्वाचन क्षेत्र में विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करने के लिए अपने मूल मतदाताओं को जुटाने का काम आसान नहीं है। केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया...

वाराणसी: भाजपा गठबंधन और समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन के सहयोगी दलों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी निर्वाचन क्षेत्र में विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करने के लिए अपने मूल मतदाताओं को जुटाने का काम आसान नहीं है। केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल और निषाद दलों के नेतृत्व में अपना दल (सोनेलाल) की ताकत की भी परीक्षा वाराणसी में होगी।

वाराणसी में अंतिम चरण में सात मार्च को मतदान होना है। इसी तरह अनुप्रिया की मां कृष्णा पटेल के नेतृत्व वाले अपना दल (कामेरवादी) और ओम प्रकाश राजभर के नेतृत्व वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) की अखिलेश यादव के नेतृत्व वाले गठबंधन के लिए विशेष रूप से वाराणसी में उपयोगिता की परीक्षा होगी। पार्टियों के सूत्रों का कहना है कि पटेल समुदाय के दो लाख वोट स्थानीय रूप से ओबीसी कुर्मी के रूप में जाने जाते हैं, जिसके लिए मां-बेटी के नेतृत्व वाली अपना दल (एस) और अपना दल (के) बीच रस्साकशी है, ओबीसी राजभर के एक लाख से अधिक वोट इस वाराणसी क्षेत्र में परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण साबित होंगे। हालांकि प्रधानमंत्री मोदी चार और पांच मार्च को अपने लोकसभा क्षेत्र वाराणसी में दो दिनों के लिए चुनावी युद्ध का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, वहीं विपक्षी दल भी अपने-अपने सहयोगियों के पक्ष में प्रचार में लगे हैं।

वाराणसी की रोहनिया विधानसभा सीट पर दोनो अपना दल सीधे एक-दूसरे से भिड़ रहे हैं। अनुप्रिया के नेतृत्व वाली पार्टी ने सुनील को अपनी मां के नेतृत्व वाले संगठन के अभय से लड़ने के लिए मैदान में उतारा है। अपना दल (के) भी पिंडारा निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के अवधेश सिंह और कांग्रेस अजय राय को टक्कर देने के लिए चुनाव मैदान में है। इसी तरह पूर्व मंत्री ओम प्रकाश राजभर को भगवा पार्टी के उम्मीदवारों को सीधे टक्कर देने के लिए अजगोड़ा और शिवपुर सीटें दी गई हैं। शिवपुर में राजभर के बेटे अरविंद राजभर, योगी सरकार में मंत्री अनिल राजभर के खिलाफ संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार हैं।

केंद्रीय उद्योग और वाणिज्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया, ‘‘हमने 2014, 2017 में और 2019 के पिछले चुनाव में अपनी ताकत दिखाई है।'' उन्होंने अपनी मां के नेतृत्व वाली पार्टी के खिलाफ सीधे जवाब देने से परहेज किया, जो पटेल जाति के वोटों में घुसपैठ करने का दावा कर रही है, लेकिन कहा कि ‘‘एक बार नहीं तीन बार यह साबित हो चुका है कि लोगों का समर्थन किसके पास है ... क्या साबित करने के लिए अब भी कुछ बचा है?'' लेकिन बड़ी बहन पल्लवी पटेल, जिन्होंने कौशाम्बी के सिराथू से उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को चुनौती दी है, ने कहा, इस बार स्थिति अलग हैं, क्योंकि ‘‘लोगों ने योगी आदित्यनाथ को हटाने का मन बना लिया है।''

उन्होंने भी छोटी बहन अनुप्रिया पर सीधी टिप्पणी करने से भी परहेज किया, लेकिन दावा किया कि अपना दल (के) शानदार प्रदर्शन करेगी। ओम प्रकाश राजभर, जिनकी पार्टी ने 2017 में भाजपा के सहयोगी के रूप में वाराणसी में एक सीट जीती थी, लेकिन अब अखिलेश के नेतृत्व वाले समूह का हिस्सा है, ने दावा किया कि ‘‘परिणाम वाराणसी में विपक्षी गठबंधन के पक्ष में 6-2 होगा''। तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनके रालोद सहयोगी जयंत चौधरी के साथ संयुक्त रैली की। भाजपा को चुनौती का कड़ा संदेश देने के लिए सपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के सभी सहयोगी रैली में शामिल हुए।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और बसपा प्रमुख मायावती पहले ही वाराणसी और आसपास के इलाकों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं। गौरतलब है कि 2017 में, वाराणसी की आठ विधानसभा सीटों में से, भाजपा ने छह पर जीत हासिल की थी, जबकि उसके साथी अपना दल (एस) ने एक पर जीत हासिल की थी और एक अन्य राजभर की एसबीएसपी में गई थी, जो तब भाजपा के पास थी। वाराणसी में 3.25 लाख से अधिक वैश्य, तीन लाख मुस्लिम, ब्राह्मण (2.5 लाख), पटेल स्थानीय रूप से ओबीसी कुर्मी (दो लाख), यादव (1.5 लाख), ठाकुर (एक लाख), दलित 80,000 और अन्य ओबीसी जाति के 70,000 मतदाता हैं। आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, मिर्जापुर, भदोही और सोनभद्र की 54 सीटों पर सात मार्च को मतदान होना है ।

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