तिकोनिया कांड: न्यायाधीश ने खुद को मामले की सुनवाई से अलग किया

Edited By Ramkesh, Updated: 27 Apr, 2022 06:50 PM

tikonia case judge recuses himself from hearing the case

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने बुधवार को लखीमपुर खीरी के तिकोनिया कांड मामले में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र ''टेनी'' के बेटे आशीष मिश्र की जमानत की अर्जी पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। आशीष ने...

लखनऊ: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने बुधवार को लखीमपुर खीरी के तिकोनिया कांड मामले में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र 'टेनी' के बेटे आशीष मिश्र की जमानत की अर्जी पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। आशीष ने उच्चतम न्यायालय द्वारा पिछली 18 अप्रैल को जमानत रद्द किये जाने के बाद गत रविवार को लखीमपुर खीरी की एक स्थानीय अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था। शीर्ष अदालत ने प्रासंगिक तथ्यों और इस तथ्य पर ध्यान देने के बाद कि पीड़ितों को सुनवाई का पूरा अवसर नहीं दिया गया था, गुण-दोष के आधार पर नए सिरे से सुनवाई के लिए जमानत अर्जी को वापस भेज दिया था। जमानत अर्जी पर सुनवाई से पहले ही न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया। न्यायमूर्ति सिंह ने ही पूर्व में आशीष को जमानत दी थी, जिसे उच्चतम न्यायालय ने 18 अप्रैल को रद्द कर दिया था। प्रकरण की सुनवाई के लिये नये न्यायाधीश के मनोनयन के बाद अदालत मामले की अगली सुनवाई के लिये तारीख नियत करेगी।

उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दी गई जमानत 18 अप्रैल को रद्द कर दी थी और उन्हें एक सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने को कहा था। न्यायालय ने कहा कि पीड़ितों को जांच से लेकर आपराधिक मुकदमे की समाप्ति तक कार्यवाही में हिस्सा लेने का ‘निर्बाध' अधिकार है। शीर्ष अदालत ने कहा था कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय में ‘पीड़ितों' को निष्पक्ष एवं प्रभावी तरीके से नहीं सुना गया, क्योंकि उसने (उच्च न्यायालय ने) ‘‘साक्ष्यों को लेकर संकुचित दृष्टिकोण अपनाया।'' उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि उच्च न्यायालय ने अप्रासंगिक विवेचनाओं को ध्यान में रखा और प्राथमिकी की सामग्री को अतिरिक्त महत्व दिया।

गौरतलब है कि पिछले साल तीन अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में हिंसा के दौरान आठ लोग मारे गए थे। यह हिंसा तब हुई थी जब कृषि कानूनों के खिलाफ आक्रोशित किसान उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का केंद्रीय मंत्री टेनी के गांव में आयोजित एक कार्यक्रम में जाने का विरोध कर रहे थे। पुलिस में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, एक वाहन जिसमें आशीष मिश्रा बैठे थे, उसने चार किसानों को कथित तौर पर कुचल दिया था। घटना के बाद गुस्साए किसानों ने वाहन चालक और दो भाजपा कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर पीट-पीट कर मार डाला था। इस दौरान हुई हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हो गई थी।
 

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