Edited By Ramkesh,Updated: 02 Mar, 2026 05:25 PM

मध्य पूर्व में जारी इजराइल-ईरान युद्ध का असर केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव भारत के कई राज्यों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में भी देखने को मिल सकता है। खास तौर पर व्यापार, पेट्रोल-डीजल की कीमतें, प्रवासी भारतीयों की...
लखनऊ: मध्य पूर्व में जारी इजराइल-ईरान युद्ध का असर केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव भारत के कई राज्यों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में भी देखने को मिल सकता है। खास तौर पर व्यापार, पेट्रोल-डीजल की कीमतें, प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और निर्यात-आयात से जुड़े क्षेत्रों पर इसका असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव शुरू हो गया है। इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है और उत्तर प्रदेश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंका भी बढ़ गई है। यदि ऐसा होता है तो परिवहन, कृषि और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ सकता है।
उद्योगों को नुकसान की संभावना
इसके अलावा उत्तर प्रदेश के कई जिले जैसे मुरादाबाद, सहारनपुर, अलीगढ़, कानपुर और नोएडा से बड़ी संख्या में व्यापारी मध्य पूर्व के देशों के साथ कारोबार करते हैं। युद्ध की स्थिति में निर्यात-आयात प्रभावित होने से इन उद्योगों को नुकसान हो सकता है। साथ ही मध्य पूर्व के देशों में बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश के लोग काम करते हैं। युद्ध की स्थिति गंभीर होने पर उनकी सुरक्षा और वापसी को लेकर सरकार को विशेष कदम उठाने पड़ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि युद्ध लंबा चलता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के उद्योग, व्यापार और आम जनता की जेब पर भी देखने को मिल सकता है।