मौलाना अरशद मदनी बोले- बुलडोजर के सहारे मुसलमानों को तबाह करने की खतरनाक राजनीति तुरंत हो बंद

Edited By Tamanna Bhardwaj, Updated: 18 Apr, 2022 06:00 PM

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यूपी विधानसभा चुनाव के बाद से प्रदेश की सियासत बुलडोजर शब्द के इर्द गिर्द घूम रही है। सीएम योगी सहित कई बीजेपी नेता अपने बयानों में इसका प्रयोग कर रहे हैं तो वहीं पुलिस...

सहारनपुर: यूपी विधानसभा चुनाव के बाद से प्रदेश की सियासत बुलडोजर शब्द के इर्द गिर्द घूम रही है। सीएम योगी सहित कई बीजेपी नेता अपने बयानों में इसका प्रयोग कर रहे हैं तो वहीं पुलिस प्रशासन भी लगातार अपराधियों की अवैध सपंत्ति पर बुलडोजर चलवा रहा है। ऐसे में बुलडोजर वाले एक्शन के खिलाफ मौलाना अरशद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया हैं। मौलाना अरशद मदनी के निर्देश पर जमीअत उलमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर बुलडोजर वाली कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि बीजेपी शासित राज्यों में अपराध रोकथाम की आड़ में अल्पसंख्यकों खासकर मुसलमानों के खिलाफ खतरनाक राजनीति शुरू होने की बात कही गई है। याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट ऐसा आदेश पारित करे जिससे किसी का घर और दुकान न तोड़ा जाए। एक प्रेस नोट जारी कर जमीअत उलमा-ए-हिंद ने कहा कि बीजेपी शासित राज्यों में अपराध की रोकथाम की आड़ में अल्पसंख्यकों विशेषकर मुसलमानों को तबाह करने के उद्देश्य से बुलडोज़र की जो ख़तरनाक राजनीति शुरू हुई है, उसके खि़लाफ़ क़ानूनी संघर्ष के लिए भारतीय मुसलमानों का प्रतिनिधि संगठन जमीअत उलमा-ए-हिंद ने इस तानाशाही और क्रूरता को रोकने के लिए मौलाना अरशद मदनी के विशेष आदेश पर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। जिसमें जमीअत उलमा-ए-हिन्द क़ानूनी इमदादी कमेटी के सचिव गुलज़ार अहमद आज़मी वादी बने हैं। इस याचिका में अदालत से यह अनुरोध किया गया है कि वह राज्यों को आदेश दे कि अदालत की अनुमति के बिना किसी का घर या दुकान को गिराया नहीं जाएगा।

जमीअत उलमा-ए-हिंद का कहना है कि उत्तर प्रदेश में बुलडोज़र की राजनीति पहले से जारी है, लेकिन अब यह सिलसिला गुजरात और मध्य प्रदेश में भी शुरू हो चुका है। हाल ही में राम नवमी के अवसर पर मध्य प्रदेश के खरगोन शहर में जुलूस के दौरान अति भड़काऊ नारे लगाकर पहले तो दंगा किया गया और फिर राज्य सरकार के आदेश से एकतरफा कार्रवाई करते हुए मुसलमानों के घरों और दूकानों को ढहा दिया गया। राज्य सरकार की इस क्रूरता की न्यायप्रिय लोगों की ओर से कड़ी निंदा की जा रही है। वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश सरकार अपनी इस क्रूर कार्रवाई का बचाव कर रही है।

याचिका में केन्द्र सरकार के साथ-साथ उतर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात राज्यों को पार्टी बनाया गया जहां हाल के दिनों में मुसलमानों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। याचिका ऐडवोकेट सारिम नवेद ने सीनीयर ऐडवोकेट कपिल सिब्बल से सलाह-मश्वरा करने के बाद तैयार की है, जबकि ऐडवोकेट आन रिकार्ड कबीर दिक्षित ने इसे ऑनलाइन दाखिल किया है। अगले चंद दिनों में याचिका पर जल्द सुनवाई के लिए चीफ़ जस्टिस आफ़ इंडिया से अनुरोध किया जा सकता है। 

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