बैंक फ्रॉड केस में बड़ा खुलासा: बैंक मित्र शिवा राव की मां-पत्नी गिरफ्तार, नौकर को आरोपी ने गिफ्ट की थी कार

Edited By Ramkesh,Updated: 02 Mar, 2026 07:21 PM

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ  में करोड़ों रुपये की बैंक ठगी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। बैंक मित्र शिवा राव के बाद अब उसकी मां, पत्नी और नौकर को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच में तीनों के खातों में करीब 12 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन...

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ  में करोड़ों रुपये की बैंक ठगी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। बैंक मित्र शिवा राव के बाद अब उसकी मां, पत्नी और नौकर को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच में तीनों के खातों में करीब 12 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। पुलिस को शक है कि इस बड़े घोटाले में बैंक के कुछ कर्मचारियों की भी मिलीभगत हो सकती है।

वहीं इस घटना को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर कई सवाल दागे हैं। कांग्रेस ने कहा एक 'बैंक मित्र' ने बैंक ऑफ बड़ौदा की नाक के नीचे समानांतर बैंक चला दिया और किसी को खबर तक नहीं हुई? 12 करोड़ का ट्रांजेक्शन हो गया और सोती रही यूपी पुलिस और बैंकिंग सिस्टम। 12 करोड़ के हेरफेर ने साबित कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में अब बैंकों के भीतर भी आम आदमी का पैसा सुरक्षित नहीं है। जुमलेबाजी छोड़ो, जनता का पैसा वापस करो!" क्या यही है आपका भ्रष्टाचार-मुक्त प्रदेश?

जानिए पूरा मामला 
मामला लखनऊ के पारा इलाके में शकुंतला विश्वविद्यालय कैंपस स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा से जुड़ा है। यहां कर्नाटक का रहने वाला शिवा राव बैंक मित्र के तौर पर काम करता था। आरोप है कि उसने ग्राहकों को बैंक में जाने के बजाय सीधे अपने पास पैसे जमा कराने के लिए भरोसे में लिया और उन्हें फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने का झांसा दिया।

एफडी की रकम नहीं मिली फिर खुली पोल 
जब निवेश की अवधि पूरी हुई तो लोगों को न तो उनकी एफडी की रकम मिली और न ही बैंक खातों में पैसा दिखाई दिया। इसके बाद कई पीड़ित बैंक शाखा पहुंच गए और जमकर हंगामा किया। धीरे-धीरे कई अन्य लोग भी सामने आए, जिन्होंने लाखों रुपये की ठगी का आरोप लगाया। पीड़ितों का कहना है कि कुछ रकम RTGS के जरिए ट्रांसफर की गई थी, लेकिन वह भी खातों से गायब हो गई। कई परिवारों ने अपनी बेटियों की शादी के लिए पैसे जमा किए थे, लेकिन पैसे न मिलने के कारण शादी की तारीख तक टालनी पड़ी।

ग्राहकों को बचत योजनाओं का देता था झांसा 
इस मामले में पुलिस ने फरवरी के पहले सप्ताह में मुख्य आरोपी शिवा राव को गिरफ्तार किया था। अगले ही दिन उसके सहयोगी और बैंक के पूर्व सिक्योरिटी गार्ड दीपक को भी हिरासत में लिया गया था। जांच में सामने आया कि शिवा राव वर्ष 2015 से बैंक से जुड़ा हुआ था और ग्राहकों से संपर्क कर उन्हें विभिन्न बचत योजनाओं के नाम पर झांसा देता था।

12 करोड़ रुपये के लेन-देन के मिले सबूत 
जांच के दौरान पुलिस ने 1 मार्च को शिवा राव की मां कारा निर्मला, पत्नी भाग्यवती और नौकर विकास कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक तीनों के बैंक खातों में करीब 12 करोड़ रुपये के लेन-देन के सबूत मिले हैं। बताया जा रहा है कि शिवा ने ठगी की रकम में से करीब डेढ़ करोड़ रुपये अपने नौकर के खाते में ट्रांसफर किए और उसके लिए एक कार भी खरीदी थी।

संदेह के दायरे में कर्मचारियों की भूमिका 
पुलिस को आशंका है कि इतने बड़े घोटाले को अंजाम देने में बैंक के कुछ कर्मचारियों की भी भूमिका हो सकती है। जांच के दौरान आरोपियों के पास से करीब ढाई लाख रुपये के जेवर, एक कार, चांदी के सिक्के, तीन मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, प्रिंटर और 47 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं। इसी प्रिंटर की मदद से एफडी की फर्जी रसीदें तैयार कर ग्राहकों को दी जाती थीं।

बैंक शाखा में लगी थी संदिग्ध परिस्थितियों में लगी
इस बीच, इसी बैंक शाखा में 25 नवंबर 2025 को संदिग्ध परिस्थितियों में लगी आग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आग में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जलकर नष्ट हो गए थे। पीड़ितों का आरोप है कि ठगी के सबूत मिटाने के लिए यह आग लगाई गई थी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और बैंक के अंदरूनी लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।


 

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