माघ मेले की 14 जनवरी से होगी शुरुआत, आस्था की डुबकी लगाने के लिए  संगम तट पर पहुंच रहे श्रद्धालु

Edited By Ramkesh, Updated: 01 Jan, 2022 12:34 PM

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देश के सबसे बड़े धार्मिक मेले माघ मेले के लिए  साधु संतों का मेला क्षेत्र में आना शुरू हो गया है।  14 जनवरी से संगम तट पर 47 दिनों तक दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला का आयोजन हो रहा है।  -देश के कोने कोने से हजारों की संख्या में साधु संत मेला में...

प्रयागराज: देश के सबसे बड़े धार्मिक मेले माघ मेले के लिए  साधु संतों का मेला क्षेत्र में आना शुरू हो गया है।  14 जनवरी से संगम तट पर 47 दिनों तक दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला का आयोजन हो रहा है।  -देश के कोने कोने से हजारों की संख्या में साधु संत मेला में आते हैं। इसी से लेकर साधु संत मेला क्षेत्र पहुंच रहे हैं और माघ मेले की तैयारियों में  जुट गए हैं । साधु संत प्रशासन द्वारा दी गई जमीनों पर अपनी पूजा साधना और कलप वासियों के लिए अच्छी सुविधा देने के लिए अभी से ही व्यवस्था करने में जुट गए हैं । 47 दिनों तक पूरे संगम क्षेत्र में धार्मिक गानों की गूंज रहती है और भारी संख्या में देश दुनिया के कोने-कोने से श्रद्धालु संगम तट पर आते हैं और आस्था की डुबकी लगाते हैं ।

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साधु-संतों का कहना है कि इस बार दोनों नदियों में आई बाढ़ की वजह से मेला कार्य की तैयारियों में थोड़ी कमी रह गई है और इसी को ध्यान में रखते हुए वह पहले से ही संगम तट पर आ गए हैं । हालांकि प्रशासन का दावा है कि 14 जनवरी से पहले  सभी निर्माण कार्य पूरे कर लिए जाएंगे । बेतहाशा ठंड की वजह से कार्य की गति में तेजी नहीं देखी जा रही है ।संगम क्षेत्र में साधु संतों का जमावड़ा देखने को मिल रहा है कोई महाराष्ट्र से तो कोई मध्य प्रदेश से तो कोई राजस्थान से साधु संत आए हुए हैं और माघ मेले की तैयारियों में जुट गए हैं ।

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गौरतलब है कि संगम तट पर हर साल लगने वाले माघ मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने तो आते ही हैं साथ ही साथ हजारों की संख्या में देश के कोने-कोने से साधु संत भी संगम की रेती पर कल्पवास  करने के लिए हर साल आते हैं।मान्यता है कि जो भी साधु संत या श्रद्धालु संगम की रेती  पर 1 महीने तक कल्पवास करता है तो  उसके जीवन काल में हर परेशानियां भी दूर होती हैं । हालांकि साधु संत अभी से ही संगम तट आकर के अपने पंडाल को बनाने और सजाने के कार्य में जुट गए हैं । 22 दिसंबर से ही मेला प्रशासन ने जमीनों के आवंटन की शुरुआत कर दी थी । जिसके बाद साधु संतों और अन्य संस्थानों को जमीन आवंटित का कार्य तेजी से चल रहा है।

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