Edited By Purnima Singh,Updated: 16 Feb, 2026 06:07 PM

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए सोमवार को कहा कि आक्रांताओं का महिमामंडन और देशद्रोही तत्वों के समर्थन में बयानबाजी करना किसी राष्ट्रद्रोह से कम नहीं है तथा इन दलों की प्रवृत्ति यह दिखाती है कि उनमें...
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए सोमवार को कहा कि आक्रांताओं का महिमामंडन और देशद्रोही तत्वों के समर्थन में बयानबाजी करना किसी राष्ट्रद्रोह से कम नहीं है तथा इन दलों की प्रवृत्ति यह दिखाती है कि उनमें 'भारत की आस्था' के प्रति कोई सम्मान नहीं है। योगी ने विधान परिषद में अपने संबोधन में कहा कि 'भारत की आस्था' उत्तर प्रदेश में निवास करती है। उन्होंने कहा, '' प्रदेश अपनी विरासत पर गौरव की अनुभूति करता है और विरासत से युक्त विकास ही एक उज्जवल भविष्य की आधारशिला होता है, लेकिन अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए अगर कोई उन आक्रांताओं का महिमामंडन करता है, जिन्होंने भारत की आत्मा पर प्रहार किया और 'भारत की आस्था' को रौंदने का कार्य किया तो आज का नया उत्तर प्रदेश इसको स्वीकार करने को तैयार नहीं है।''
मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा, ''आक्रांताओं का महिमामंडन करना, देशद्रोही तत्वों के समर्थन में बयानबाजी करना और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करना किसी राष्ट्रद्रोह से कम नहीं है।'' योगी ने कहा, ''अगर हम आक्रांताओं का महिमामंडन कर रहे हैं और राष्ट्र के प्रतीकों यानी तिरंगे और राष्ट्रीय गीत का अपमान कर रहे हैं, तो एक प्रकार से हम संविधान की अवहेलना कर रहे हैं।'' उन्होंने सवाल किया कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस एक तरफ संविधान के नाम पर जनता की आंखों में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं और दूसरी तरफ वंदे मातरम जैसे राष्ट्रीय गीत का विरोध कर रहे हैं।
योगी ने आरोप लगाया, '' सपा और कांग्रेस के सदस्य धड़ल्ले से बोल रहे हैं कि वह वंदे मातरम के लिए नहीं खड़े होंगे। यानी हिंदुस्तान में रहोगे और भारत के राष्ट्रगान तथा राष्ट्रीय गीत को गाने में दिक्कत होती है? यह चीज नहीं चल सकती हैं।'' उन्होंने कहा, ''मुझे आश्चर्य होता है कि समाजवादी पार्टी के लोग गाजी (सूफी संत सैयद सालार गाजी) के मेले का समर्थन करते हैं। गाजी भारत की परंपरा और संस्कृति को रौंदने के लिए आया था। श्रावस्ती के तत्कालीन नरेश महाराजा सुहेलदेव के नेतृत्व में हिंदू राजाओं ने उसको रौंद डाला। सम्मान तो सुहेलदेव को मिलना चाहिए था और हमें आनंद की अनुभूति होती है कि हमारी 'डबल इंजन' की सरकार ने महाराजा सुहेलदेव के नाम पर बहराइच में उनका भव्य स्मारक बनाया है।''