CM Yogi की मौजूदगी में काशी रचेगी कीर्तिमान, शहरी वन का होगा आगाज; 60 घाटों के स्वरूप में सजेंगे 3 लाख पौधे

Edited By Pooja Gill,Updated: 01 Mar, 2026 09:37 AM

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वाराणसी: काशी अब पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी विश्व पटल पर अपनी अमिट छाप छोड़ने जा रही है। नगर निगम द्वारा सुजाबाद डोमरी क्षेत्र के 350 बीघा में विकसित किए जा रहे आधुनिक ‘शहरी वन' की तैयारियां...

वाराणसी: काशी अब पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी विश्व पटल पर अपनी अमिट छाप छोड़ने जा रही है। नगर निगम द्वारा सुजाबाद डोमरी क्षेत्र के 350 बीघा में विकसित किए जा रहे आधुनिक ‘शहरी वन' की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इस ऐतिहासिक परियोजना का भव्य शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को करेंगे। सूबे के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने शनिवार को डोमरी पहुंचकर इस महत्वाकांक्षी परियोजना का अवलोकन किया। उन्होंने तैयारियों पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे आने वाली पीढि़यों के लिए एक ‘ऑक्सीजन बैंक' बताया। निरीक्षण के दौरान महापौर अशोक कुमार तिवारी एवं नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने वित्त मंत्री को नक्शे के माध्यम से प्रत्येक सेक्टर की जानकारी दी।       

इन घाटों पर रोपे जाएंगे पौधे 
एक मार्च (रविवार) को एक साथ तीन लाख से अधिक पौधों का रोपण कर नया कीर्तिमान स्थापित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक पल को दर्ज करने के लिए ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' की टीम भी वाराणसी पहुंच चुकी है। दोपहर ढाई बजे मुख्यमंत्री वृक्षारोपण कार्यक्रम के संबंध में प्रस्तुतीकरण देखेंगे और प्रमाणपत्रों का वितरण भी करेंगे। इस ‘शहरी वन' की सबसे अनूठी विशेषता इसकी बनावट है। पूरे वन क्षेत्र को 60 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक सेक्टर का नाम काशी के प्रसिद्ध गंगा घाटों के नाम पर रखा गया है, जैसे-दशाश्वमेध, ललिता घाट, नया घाट, केदार घाट, चौशट्टी घाट, मानमंदिर घाट और शीतला घाट। प्रत्येक सेक्टर में पांच हजार पौधे रोपे जाएंगे। 

गंगा किनारे एक हरा-भरा ‘मिनी काशी' 
यह न केवल पौधों का समूह होगा, बल्कि गंगा किनारे एक हरा-भरा ‘मिनी काशी' का स्वरूप नजर आएगा। यह परियोजना केवल हरियाली तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर निगम के लिए आय का बड़ा स्रोत भी बनेगी। मध्य प्रदेश की एमबीके संस्था के साथ हुए समझौते के तहत तीसरे वर्ष से ही निगम को दो करोड़ रुपये की आय होने लगेगी, जो सातवें वर्ष तक सात करोड़ रुपये वार्षिक तक पहुंच सकती है। यहां आम, अमरूद, पपीता के साथ-साथ अश्वगंधा, शतावरी और गिलोय जैसी औषधीय पौधे उगाए जाएंगे। फूलों की खेती में गुलाब, चमेली और पारिजात जैसे फूलों से राजस्व प्राप्ति का मॉडल तैयार किया गया है। 

आधुनिक सिंचाई प्रणाली का जाल बिछाया
तीन लाख पौधों को जीवित रखने के लिए मियावाकी पद्धति के साथ आधुनिक सिंचाई प्रणाली का जाल बिछाया गया है। करीब 10,827 मीटर लंबी पाइपलाइन, 10 बोरवेल और 360 ‘रेन गन' सिस्टम लगाए गए हैं। साथ ही नदी किनारे की मिट्टी को बचाने के लिए शीशम, अर्जुन, सागौन और बांस जैसी 27 देशी प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई है। पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए वन के भीतर चार किलोमीटर लंबा पाथवे भी बनाया गया है। मियावाकी पद्धति जापानी वनस्पति शास्त्री अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित की गई एक ऐसी तकनीक है, जिससे बहुत कम जगह में घने और देशी जंगल उगाए जा सकते हैं। इस विधि से लगाए गए पौधे सामान्य पौधों की तुलना में 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं। 
 

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