गणेश शंकर विद्यार्थी का त्याग और समर्पण सभी के लिए प्रेरणादायी: सीएम योगी

Edited By Pooja Gill,Updated: 26 Oct, 2024 10:39 AM

ganesh shankar vidyarthi s sacrifice

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज (शनिवार) महान स्वाधीनता सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। सीएम योगी ने कहा कि ''राष्ट्र के लिए उनका त्याग और समर्पण सभी के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत...

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज (शनिवार) महान स्वाधीनता सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। सीएम योगी ने कहा कि ''राष्ट्र के लिए उनका त्याग और समर्पण सभी के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत है।'' बता दें कि कलम से क्रांति लाने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी की आज जयंती है।

सीएम योगी ने किया पोस्ट
मुख्यमंत्री ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' के अपने आधिकारिक हैंडल पर एक पोस्ट में कहा, “अपनी सजग पत्रकारिता और सामाजिक सक्रियता से भारतीय स्वाधीनता संग्राम को नई दिशा देने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि!” योगी ने कहा कि राष्ट्र के लिए उनका त्याग और समर्पण सभी के लिए अत्यधिक प्रेरणादायी है।

 


डिप्टी सीएम ने दी श्रद्धांजलि
उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी गणेश शंकर विद्यार्थी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ''ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भारतीय किसानों की आवाज को बुलंद करने वाले राष्ट्र के रत्न, निडर एवं निष्पक्ष पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन।''

 


25 मार्च 1931 को हुई थी हत्या
गणेश शंकर विद्यार्थी हिंदी भाषा के समाचार पत्र ‘प्रताप' के संस्थापक-संपादक के रूप में जाने जाते हैं। उनका जन्म 26 अक्टूबर 1890 को प्रयागराज (इलाहाबाद) के एक मोहल्ले में अपने ननिहाल में हुआ था। वह फतेहपुर जिले के हथगांव के निवासी थे। 25 मार्च 1931 को गणेश शंकर विद्यार्थी कराची के कांग्रेस के सम्मेलन में जाने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन तभी उन्हें खबर मिली की शहर में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए हैं और लोगों को जान बचाने के लिए फौरन ही घर से निकल पड़े। भीड़ के सामने पहुंच कर पीड़ितों को बचाने के साथ दंगाइयों को भी समझाने की कोशिश रहे थे। उन्होंने हिंदू मुस्लिम दोनों संप्रदाय के लोगों की जान बचाई। इस प्रयास में दंगाइयों ने उन्हें निर्ममता से मार दिया। बाद में कानपुर में ही लाशों के ढेर के उनका शव मिला। गांधी जी ने उनकी मौत पर कहा था कि काश ऐसी मौत उन्हें नसीब होती।   

 

 

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