प्रतापगढ़ में दलित की हत्या के पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा

Edited By Ramkesh,Updated: 27 Mar, 2026 05:35 PM

five people convicted of murdering a dalit in pratapgarh were sentenced to life

प्रतापगढ़ की एक विशेष अदालत ने अनुसूचित जाति के एक व्यक्ति की हत्या के करीब 25 वर्ष पुराने मामले में पांच लोगों को दोषी करार देते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। एक शासकीय अधिवक्ता ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

प्रतापगढ़: प्रतापगढ़ की एक विशेष अदालत ने अनुसूचित जाति के एक व्यक्ति की हत्या के करीब 25 वर्ष पुराने मामले में पांच लोगों को दोषी करार देते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। एक शासकीय अधिवक्ता ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) सुरेश बहादुर सिंह ने बताया कि अपर सत्र न्यायाधीश (एससी/एसटी) हेमंत कुमार ने साक्ष्यों के आधार पर इस मामले में महाजन का पुरवा निवासी रामबाबू, छेदीलाल, श्यामसुंदर उर्फ कल्लू, त्रिभुवन और हरिनारायण को दोषी ठहराया और 21-21 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, महाजन का पुरवा निवासी वादी पंचमलाल ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया था कि उसका चचेरा भाई मुनेश 26 दिसंबर 2001 की सुबह करीब सात बजे घर से बाहर गया था तभी गामा के मकान के पास पहुंचने पर गांव के कल्लू उर्फ श्याम सुंदर, राम बाबू और छेदीलाल ने उसके साथ मारपीट की। इसने बताया कि वह जान बचाकर घर के पास पहुंचा, तभी राम बाबू अपनी लाइसेंसी बंदूक और त्रिभुवन, हरिनारायण, शिवबाबू, श्याम सुंदर उर्फ कल्लू व छेदीलाल लाठी-डंडों के साथ वहां पहुंचे और सभी ने उनके परिजनों पर हमला कर दिया।

शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि इस हमले में गामा (42) और राम सजीवन समेत कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्होंने बताया कि गंभीर चोट के कारण गामा की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि पुलिस ने इस मामले में छह आरोपियों के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना पूरी होने के बाद आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। सिंह ने बताया कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान एक आरोपी शिवबाबू की मृत्यु हो गई।

 

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