Edited By Purnima Singh,Updated: 09 Jan, 2026 06:35 PM

अमेरिका के न्यू जर्सी की रहने वाली एरिका टेट की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया और दुनियाभर की चर्चा में है। एरिका का दावा है कि करीब 7 घंटे तक वह क्लिनिकली डेड रहीं और इस दौरान उन्होंने उस दुनिया का अनुभव किया, जिसे आम भाषा में लोग परलोक या स्वर्ग कहते...
Viral News : अमेरिका के न्यू जर्सी की रहने वाली एरिका टेट की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया और दुनियाभर की चर्चा में है। एरिका का दावा है कि करीब 7 घंटे तक वह क्लिनिकली डेड रहीं और इस दौरान उन्होंने उस दुनिया का अनुभव किया, जिसे आम भाषा में लोग परलोक या स्वर्ग कहते हैं। उनके अनुसार, मौत के करीब पहुंचकर जो उन्होंने देखा और महसूस किया, उसने उनकी सोच और जीवन का नजरिया पूरी तरह बदल दिया।
2015 का दर्दनाक हादसा
यह घटना साल 2015 की है, जब 32 वर्षीय एरिका न्यू जर्सी के पैलिसेड्स क्लिफ्स इलाके में हाइकिंग कर रही थीं। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वह करीब 60 फीट गहरी खाई में गिर गईं। हादसा इतना गंभीर था कि उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई, पसलियां और हाथ फ्रैक्चर हुए, और दोनों फेफड़े भी क्षतिग्रस्त हो गए।
7 घंटे बाद पहुंची रेस्क्यू टीम
एरिका ने मदद के लिए फोन किया, लेकिन सही लोकेशन न मिलने के कारण रेस्क्यू टीम को पहुंचने में करीब 7 घंटे लग गए। जब उन्हें अस्पताल लाया गया, तब डॉक्टरों के मुताबिक उनकी हालत बेहद नाजुक थी और वह क्लिनिकली मृत मानी जा रही थीं।
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मौत के करीब का अनुभव
एरिका के अनुसार, इस दौरान उन्होंने खुद को अपने शरीर से अलग महसूस किया और ऊपर से अपने घायल शरीर को देखा। उन्होंने बताया कि दर्द बिल्कुल महसूस नहीं हुआ, बल्कि एक अद्भुत शांति और सुकून का एहसास हुआ। इस दौरान उनकी पूरी जिंदगी एक फिल्म की तरह आंखों के सामने चलने लगी। उन्होंने अपने पुराने फैसलों, रिश्तों और दूसरों को दिए गए दुख को गहराई से महसूस किया।
न स्वर्ग, न नरक, केवल रोशनी
एरिका का कहना है कि इस अनुभव में ना कोई स्वर्ग था, ना नरक, ना कोई फरिश्ता या न्याय करने वाली शक्ति। उनके अनुसार, वहां एक तेज और चमकदार रोशनी थी, जो उन्हें अपनी ओर खींच रही थी। एरिका इसे ‘यूनिवर्सल कॉन्शसनेस’ या ईश्वर का रूप मानती हैं। यह रोशनी प्यार, शांति और अपनापन से भरी हुई थी।
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अनुभव ने बदल दी जीवन दृष्टि
इस हादसे से पहले एरिका आध्यात्मिकता या ईश्वर में विश्वास नहीं करती थीं। लेकिन अब उनका मानना है कि मौत अंत नहीं है, बल्कि एक भ्रम है। उनके अनुसार, सभी इंसान एक ही ऊर्जा से जुड़े हैं और किसी को दुख देना दरअसल खुद को नुकसान पहुंचाने जैसा है।
एरिका लोगों को यही संदेश देती हैं कि स्वर्ग और नर्क की चिंता करने के बजाय करुणा, प्रेम और एकता के साथ जीवन जीना ज्यादा महत्वपूर्ण है। उनकी यह कहानी आज सोशल मीडिया पर जिज्ञासा और बहस का विषय बनी हुई है।