UGC का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों के सामने डिप्टी सीएम ने जोड़े हाथ, कहा- छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे

Edited By Ramkesh,Updated: 01 Apr, 2026 05:57 PM

deputy chief minister folded his hands before the protesters opposing the ugc

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों के विरोध में बुधवार को लखनऊ में सवर्ण मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के आवास पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने शंख बजाकर अपना विरोध दर्ज कराते हुए यूजीसी के...

लखनऊ: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों के विरोध में बुधवार को लखनऊ में सवर्ण मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के आवास पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने शंख बजाकर अपना विरोध दर्ज कराते हुए यूजीसी के नियमों को 'काला कानून' करार दिया। डिप्टी सीएम हाथ जोडे़ पहुंचे। प्रदर्शनकारियों के पास पहुंचते ही वे कमर तक झुकते हुए हाथ जोड़कर अभिवादन करने लगे। जवाब में सबने उसी तरह प्रणाम किया। इसके बाद उन्होंने स्वयं कमरे का दरवाजा खोला और सभी को अंदर ले गए।

आखिर ऐसे नियम लाने की आवश्यकता क्यों?
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार से सवाल किया कि आखिर ऐसे नियम लाने की आवश्यकता क्यों पड़ी, जिनसे सामान्य वर्ग के छात्रों के हित प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यूजीसी के नए नियम छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय हैं और इन्हें किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

प्रदर्शनकारियों के सामने हाथ जोड़कर पाठक ने किया अभिवादन 
प्रदर्शनकारियों से मिलने पहुंचे उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया और उनकी बातों को सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे स्वयं सामान्य वर्ग से आते हैं और किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। उनके इस बयान के बाद प्रदर्शनकारियों का आक्रोश कम हुआ और उन्होंने शांतिपूर्वक प्रदर्शन समाप्त कर दिया। इस प्रदर्शन में संगठन के संयोजक संदीप सिंह, राष्ट्रीय प्रवक्ता पंडित अभिनव नाथ त्रिपाठी और बसंत सिंह बघेल समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए।

संयोजक संदीप सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी में सवर्ण समाज के कई लोग महत्वपूर्ण पदों पर हैं, इसलिए उनसे जवाबदेही तय करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि करीब 50 कार्यकर्ता उपमुख्यमंत्री के आवास पर पहुंचे थे।  प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि जिस कानून को लेकर विवाद है, उस पर फिलहाल न्यायालय ने रोक लगा दी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस पर पुनर्विचार किया जाए, अन्यथा आगे आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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