लखीमपुर खीरी हिंसा: आशीष मिश्रा को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, अन्य आरोपियों की जमानत याचिका भी खारिज

Edited By Imran, Updated: 09 May, 2022 07:27 PM

bail plea of  four accused of lakhimpur kheri violence rejected

लाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा उर्फ टेनी के पुत्र आशीष मिश्रा उर्फ मोनू की कथित संलिप्तता वाली लखीमपुर खीरी हिंसा के चार आरोपियों लवकुश, अंकित दास, सुमित जायसवाल और शिशुपाल की जमानत याचिका सोमवार को...

लखनऊ: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा उर्फ टेनी के पुत्र आशीष मिश्रा उर्फ मोनू की कथित संलिप्तता वाली लखीमपुर खीरी हिंसा के चार आरोपियों लवकुश, अंकित दास, सुमित जायसवाल और शिशुपाल की जमानत याचिका सोमवार को खारिज कर दी। इस बीच आशीष मिश्र की जमानत याचिका पर सुनवाई 25 मई तक के लिए टाल दी गई। 

न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की एकल पीठ ने चारों आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि ये सभी मुख्य आरोपी आशीष के साथ सक्रिय रूप से योजना बनाने एवं इस जघन्य कांड को अंजाम देने में शामिल रहे थे। अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले के सभी आरोपी राजनीतिक रूप से अत्यधिक प्रभावशाली हैं, अतः जमानत पर छूटने के बाद इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि वे साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे और गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे। पीठ ने एसआईटी (विशेष जांच दल) के इस निष्कर्ष को भी ध्यान में रखा कि यदि केंद्रीय मंत्री टेनी ने कुछ दिन पहले किसानों के खिलाफ जनता के बीच कुछ कटु वक्तव्य न दिये होते तो ऐसी घटना न होती। पीठ ने कहा कि उच्च पदों पर बैठे हुए राजनीतिक व्यक्तियों को जनता के बीच मर्यादित भाषा में बयान देना चाहिए और उन्हें अपने पद की गरिमा का ख्याल रखना चाहिए।

अपने आदेश में पीठ ने कहा कि जब उस क्षेत्र में धारा 144 लागू थी तो केंद्रीय मंत्री के गांव में कुश्ती प्रतियोगिता को रद्द न किया जाना प्रशासनिक अनदेखी है। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि उपमुख्यमंत्री को क्षेत्र में धारा 144 लागू होने का ज्ञान न रहा होगा तो भी उन्होंने और केंद्रीय मंत्री ने कुश्ती प्रतियोगिता में शामिल होने का निर्णय लिया। दूसरी ओर मामले के मुख्य आरोपी आशीष की जमानत अर्जी जस्टिस कृष्ण पहल की एकल पीठ के सामने लगी थी किन्तु उस पर सुनवाई टल गयी। गौरतलब है कि आशीष की मंजूर जमानत उच्चतम न्यायालय ने 18 अप्रैल को खारिज कर दी था और मामले को वापस उच्च न्यायालय को नये सिरे से सुनवाई के लिए भेज दिया था। उच्च न्यायालय ने 10 फरवरी को मिश्रा को जमानत दे दी थी, जिसने चार महीने हिरासत में बिताए थे। जमानत खारिज होने के बाद आशीष मिश्रा ने अदालत में समर्पण कर दिया था। 

उल्लेखनीय है कि पिछले साल तीन अक्टूबर को लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया थानाक्षेत्र में हिंसा के दौरान आठ लोगों की मौत हो गई थी। यह घटना तब हुई जब केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलित किसान उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इलाके के दौरे का विरोध कर रहे थे। उत्तर प्रदेश पुलिस की प्राथमिकी के अनुसार चार किसानों को एक एसयूवी ने कुचल दिया, जिसमें आशीष मिश्रा बैठे थे। घटना के बाद गुस्साए किसानों ने चालक और दो भाजपा कार्यकर्ताओं की कथित तौर पर पीट-पीट कर हत्या कर दी। इस हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हो गई थी।

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