Edited By Ramkesh,Updated: 02 Feb, 2026 01:04 PM

उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी में अनुशासन को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है। पार्टी कार्यक्रमों और सार्वजनिक मंचों पर बगावती तेवर दिखाने वाले नेताओं और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अब कड़ी कार्रवाई की तैयारी है। सूत्रों के अनुसार, ऐसे नेताओं से जवाब तलब...
लखनऊ: उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी में अनुशासन को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है। पार्टी कार्यक्रमों और सार्वजनिक मंचों पर बगावती तेवर दिखाने वाले नेताओं और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अब कड़ी कार्रवाई की तैयारी है। सूत्रों के अनुसार, ऐसे नेताओं से जवाब तलब किया जाएगा और संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तय मानी जा रही है।
अनुशासन समिति जल्द ही नेताओं और पदाधिकारियों को जारी करेगी नोटिस
यूपी भाजपा की अनुशासन समिति जल्द ही ऐसे नेताओं और पदाधिकारियों को नोटिस जारी करेगी, जिन्होंने हाल के दिनों में पार्टी लाइन से हटकर बयानबाजी की है या सार्वजनिक रूप से नाराज़गी जाहिर की है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से न सिर्फ संगठनात्मक एकता प्रभावित हो रही है, बल्कि जनता के बीच पार्टी की छवि को भी नुकसान पहुंच रहा है।
2027 के विधानसभा चुनाव नुकसान उठाने के मूड में नहीं है पार्टी
बीते कुछ समय में कई विधायक, जनप्रतिनिधि और संगठन से जुड़े पदाधिकारी खुलेआम सरकार और संगठन के कामकाज पर सवाल उठाते नजर आए हैं। विकास कार्यों, संगठनात्मक फैसलों और आपसी समन्वय को लेकर सामने आ रही असंतोष की आवाजों ने हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी किसी भी तरह का आंतरिक नुकसान उठाने के मूड में नहीं है।
सार्वजनिक मंच पर पार्टी विरोधी बयानबाजी स्वीकार
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अब सार्वजनिक मंचों पर अनुशासनहीनता या नेतृत्व के खिलाफ बयान देने को गंभीरता से लिया जाएगा। अनुशासन समिति ऐसे मामलों पर पैनी नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर उदाहरणात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। नेतृत्व का स्पष्ट संदेश है कि संगठन के भीतर अपनी बात रखने के लिए पार्टी के आंतरिक मंच मौजूद हैं, लेकिन सार्वजनिक बयानबाजी स्वीकार नहीं की जाएगी।
संगठन में आपसी कलह को दूर करने कोशिस में बीजेपी
भाजपा नेतृत्व ने विकास कार्यों की गति और संगठन में बढ़ती आपसी कलह को लेकर भी निगरानी तेज कर दी है। पार्टी का मानना है कि आंतरिक एकजुटता के बिना चुनावी सफलता संभव नहीं है। ऐसे में अनुशासन समिति अब सख्ती के मूड में है और आने वाले दिनों में इस दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।