Edited By Ramkesh,Updated: 25 Feb, 2026 04:03 PM

जनवरी 2026 में जारी यूजीसी के नए "इक्विटी रेगुलेशन 2026" नियमों पर जाति-आधारित भेदभाव के दायरे में ओबीसी को शामिल करने और सामान्य वर्ग के प्रति कथित भेदभाव के कारण बड़ा विवाद खड़ा हुआ है। हालांकि इस नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी। इसी बीच...
गाजियाबाद: जनवरी 2026 में जारी यूजीसी के नए "इक्विटी रेगुलेशन 2026" नियमों पर जाति-आधारित भेदभाव के दायरे में ओबीसी को शामिल करने और सामान्य वर्ग के प्रति कथित भेदभाव के कारण बड़ा विवाद खड़ा हुआ है। हालांकि इस नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी। इसी बीच बीजेपी सांसद साक्षी महाराज का एक बयान सामने आया जिसे लेकर यति नरसिंहानंद गिरी ने कड़ी नाराजगी जताई है।
Yati Narsinghanand Giri, जो गाजियाबाद स्थित Shiv Shakti Dham Dasna के पीठाधीश्वर और Shri Panch Dashnam Juna Akhara के महामंडलेश्वर हैं, ने एक वीडियो जारी कर भाजपा सांसद Sakshi Maharaj को जवाब दिया है।
राम मंदिर आंदोलन से साक्षी महाराज को मिली पहचान
वीडियो संदेश में यति नरसिंहानंद गिरी ने कहा कि साक्षी महाराज को जो भी राजनीतिक पहचान और पद मिला है, वह राम मंदिर आंदोलन और हिंदुत्व की विचारधारा के कारण मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज साक्षी महाराज तथाकथित सवर्णों को “90 प्रतिशत” के नाम पर डराने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि उनके अनुसार सवर्ण समाज के समर्थन के बिना वे कभी चुनाव नहीं जीत सकते थे।
‘वोट के बिना जीत संभव नहीं’
महामंडलेश्वर ने कहा कि जिन लोगों ने साक्षी महाराज को हमेशा सम्मान दिया, आज उन्हीं को वे अन्य वर्गों के साथ मिलकर दबाव में लेने की बात कर रहे हैं। उन्होंने इसे “शर्मनाक” करार दिया।
पार्टी बदलने पर भी उठाए सवाल
यति नरसिंहानंद गिरी ने यह भी याद दिलाया कि साक्षी महाराज पहले पिछड़ों की उपेक्षा का मुद्दा उठाकर भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में गए थे, लेकिन वहां सफलता न मिलने के बाद फिर भाजपा में लौट आए। उन्होंने इसे अवसरवादिता बताते हुए कहा कि आत्ममंथन करने के बजाय दूसरों को धमकाना उचित नहीं है। इस बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, साक्षी महाराज की ओर से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।