काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लोकार्पण का निमंत्रण पत्र है बेहद खास, 200 सालों के सफर का है जिक्र

Edited By Ramkesh,Updated: 11 Dec, 2021 01:45 PM

the invitation letter for the inauguration of kashi vishwanath

श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण समारोह के कार्यक्रम की खासियत को देखते हुए इसके निमंत्रण कार्ड को भी विशेष रूप से बनाया गया है। इस विशेष निमंत्रण पत्र के बारे में अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रनंद सरस्वती ने विस्तृत...

वाराणसी: श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण समारोह के कार्यक्रम की खासियत को देखते हुए इसके निमंत्रण कार्ड को भी विशेष रूप से बनाया गया है। इस विशेष निमंत्रण पत्र के बारे में अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रनंद सरस्वती ने विस्तृत रूप से बताया है।  बताया कि इसमे मुगल आक्रान्ताओं द्वारा मंदिर तोड़े जाने से लेकर 200 वर्षों के बाद किस तरह पीएम मोदी ने काशी विश्वनाथ मंदिर का विस्तार किया सबकुछ जिक्र है। पूरी काशी विश्वनाथ मंदिर के ऐतिहासिकता को समेटे यह निमंत्रण पत्र काशी की परिकल्पनाओ का मूर्त स्वरूप है। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण समारोह के लिए ख़ास निमंत्रण अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रनंद सरस्वती को भेजा गया है। इसके साथ ही इस महायोजन में 500 संतो के अलावा देश भर से ढाई हजार से अधिक अतिथि शामिल होंगे । 

PunjabKesari

निमंत्रण पत्र के बारे में रोचक जानकारी साझा करते हुए स्वामी जितेंद्रनंद सरस्वती ने बताया कि इस आमंत्रण पत्र में लिखा है कि वाराणसी देवाधिदेव महादेव भगवान शिव की नगरी के रूप में पुरे जग विख्यात है। इसे सामान्य श्रद्धालु काशी के रूप में भी जानते हैं, ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव आज भी साक्षात् काशी में विराजमान हैं। यहाँ मोक्षदावनी माँ गंगा के दर्शन भी सुलभ हैं। सनातन हिन्दू धर्म के केन्द्र के रूप में एवं बौद्ध और जैन पंथों के सिद्धों के साथ-साथ सन्तों, योगियों व कालान्तर में शिक्षावादियों ने अपनी साधना और सिद्धि का केन्द्र वाराणसी को बनाया है। काशी में विराजमान बाबा विश्वनाथ का ज्योर्तिलिंग द्वादश ज्योर्तिलिंग में प्रमुख स्थान पर है। मध्यकाल में मुगल आक्रान्ताओं द्वारा इस पावन स्थल को भारी क्षति पहुंचायी थी। 

PunjabKesari

 उन्होंने कहा 1777-78 ई0 में महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने इस मन्दिर परिसर का पुर्ननिर्माण कराया था एवं कालांतर में 19वीं सदी में महाराजा रणजीत सिंह ने इस मन्दिर पर स्वर्ण शिखर लगवाया था। लगभग 200 वर्षों के बाद भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री जो संसद में काशी का प्रतिनिधित्व करते हैं, उनके द्वारा काशी की पुरातन आत्मा को संरक्षित रखते हुए नये कलेवर में श्री काशी विश्वनाथ धाम परिसर के नवनिर्माण को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया है। 

PunjabKesari

नवीन श्री काशी विश्वनाथ धाम परिसर उन्हीं परिकल्पनाओं का मूर्त रूप है। हमें यह बताते हुए हार्दिक प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है कि श्री काशी विश्वनाथ धाम का शुभ लोकार्पण कार्यक्रम माननीय प्रधानमंत्री जी के कर-कमलों से पूज्य संतों व धर्माचार्यों की उपस्थिति में दिनांक 13 दिसम्बर, 2021 (विक्रम संवत् 2078 मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष दशमी तिथि) को होने जा रहा है। अतः इस शुभ अवसर पर आपकी गरिमामयी उपस्थिति प्रार्थनीय है, कृपया पधारकर अनुगृहीत करने का कष्ट करे। 

PunjabKesari

सरस्वती ने कहा कि इस निमंत्रण पत्र के मिलने के बाद मैं स्वयं को सौभाग्यशाली महसूस कर रहा हूं क्योंकि अयोध्या शिलान्यास का भी साक्षी रहा और काशी विश्वनाथ लोकार्पण का भी साक्षी बनने का सुअवसर मिल रहा है। इस निमंत्रण पत्र में जिस प्रकार से मन्दिर के इतिहास से लेकर मुगलकालीन शासकों तक का वर्णन जिस प्रकार किया गया है ,वो देश के प्रधानमंत्री मोदी जी के गुलामी के जंजीरों से निकली भारत की आत्मा को दर्शाने की जो कला है वो प्रत्येक भारतवासी को लुभाती है। हम सिर्फ विकास के ही मामले में नही बल्कि धर्म, संस्कृति के मामले में भी दुनिया के सामने भारत के गौरवशाली इतिहास को अनुभूत करते हैं।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!