4400 करोड़ी राम वनगमन पथ की खुली पोल: उद्घाटन से पहले ही धंसी सड़क, पुल में आई दरारें

Edited By Anil Kapoor,Updated: 08 Sep, 2026 10:18 AM

the 4400 crore ram vanagaman path in prayagraj has been exposed

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां भगवान राम के वनवास मार्ग को जोड़ने के लिए करीब 4,400 करोड़ रुपए की लागत से बनाए जा रहे राम वनगमन पथ की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नवाबगंज के पावन...

Prayagraj News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां भगवान राम के वनवास मार्ग को जोड़ने के लिए करीब 4,400 करोड़ रुपए की लागत से बनाए जा रहे राम वनगमन पथ की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नवाबगंज के पावन श्रृंगवेरपुर धाम के पास सड़क का करीब 100 मीटर हिस्सा कई जगहों से उखड़कर धंस गया है, जबकि नवनिर्मित पुल के कई हिस्सों में डराने वाली बड़ी-बड़ी दरारें साफ नजर आ रही हैं। मामले की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब हड़बड़ी में मरम्मत का काम शुरू कराया गया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, अयोध्या से चित्रकूट तक लगभग 210 किलोमीटर लंबे इस ड्रीम प्रोजेक्ट का मकसद श्रद्धालुओं की यात्रा को सुगम बनाना है। लेकिन श्रृंगवेरपुर धाम के पास सड़क के किनारे बना बॉर्डर टूट चुका है और डामर उखड़ गया है। सड़क धंसने के चलते किसी बड़े हादसे की आशंका को देखते हुए भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। फिलहाल वहां से केवल दोपहिया वाहन ही जान जोखिम में डालकर निकल रहे हैं। स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि करोड़ों रुपए की लागत से बन रही सड़क का उद्घाटन से पहले ही यह हाल होना सीधे तौर पर घटिया निर्माण सामग्री की ओर इशारा करता है।

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सड़क धंसने के इस हाई-प्रोफाइल मामले पर राजनीति और बयानबाजी भी तेज हो गई है। जब उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से इस बाबत सवाल किया गया, तो उन्होंने हल्का रुख अपनाते हुए कहा कि अभी बारिश का मौसम है। अगर सड़क धंस गई है तो उसे दोबारा बना दिया जाएगा। वहीं, ठेकेदार कंपनी के इंजीनियर राशिद खान ने पूरी ढिलाई की वजह क्षेत्र में हुई तेज बारिश को बताया है। उनका दावा है कि अत्यधिक पानी के कारण कुछ स्लैब दब गए हैं, जिन्हें जल्द ठीक कर लिया जाएगा।

प्रयागराज के जिलाधिकारी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट का अभी औपचारिक उद्घाटन नहीं हुआ है और न ही पुल को पीडब्ल्यूडी या संबंधित विभाग को हैंडओवर किया गया है। इसलिए कार्यदायी संस्था अपने खर्च पर इसकी मरम्मत करा रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अगर निर्माण के दौरान ही 4,400 करोड़ के प्रोजेक्ट का यह हाल है, तो भविष्य में यह सड़क और पुल कितना टिकाऊ साबित होंगे? फिलहाल मौके पर मजदूर लीपापोती और मरम्मत के काम में जुटे हुए हैं।

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