शबनम को सजा-ए-मौत के फैसले पर चाचा-चाची ने जताई खुशी, बोले- फांसी के बाद नहीं लेंगे शव

Edited By Tamanna Bhardwaj, Updated: 17 Feb, 2021 05:40 PM

shabnam s uncle and aunt expressed happiness over president s decision

देश की आजादी के बाद भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है, जब किसी महिला कैदी को फांसी पर लटकाया जाएगा। मथुरा जेल में महिला को फांसी देने की तैयारियां चल रही हैं। मथुरा जेल में बंद अमरोहा की रहने वाली शबनम की दया याचिका राष्ट्रपति ने खारिज...

अमरोहा: देश की आजादी के बाद भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है, जब किसी महिला कैदी को फांसी पर लटकाया जाएगा। मथुरा जेल में महिला को फांसी देने की तैयारियां चल रही हैं। मथुरा जेल में बंद अमरोहा की रहने वाली शबनम की दया याचिका राष्ट्रपति ने खारिज कर दी है, अमरोहा जिले के बावनखेड़ी गांव में अपने परिवार के 7 सदस्यों को मौत के घाट उतारने वाली शबनम और उसके प्रेमी सलीम की फांसी की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा। इस फैसले के बाद शबनम के चाचा और चाची सहित पूरे गांव में खुशी का माहौल है।

इस बारे में शबनम की चाची कहती हैं कि हमें तो खून का बदला खून ही चाहिए। इसे फांसी जल्द हो जाए। चाची ने कहा कि उस समय अगर हम भी घर में होते तो हम भी इसने मार डाला होता। हम घटना के बाद आधी रात में यहां पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि याचिका खारिज हो गई, हम तो बहुत खुश हैं। अच्छा किया सरकार ने इसे फांसी होनी चाहिए। वहीं  फांसी पर चढ़ाए जाने के बाद क्या डेडबॉडी लेंगीं? इस सवाल के जवाब में चाची ने कहा कि हम क्यों लेंगे? हम नहीं लेंगे। हम क्या करेंगे ऐसी लड़की की लाश लेकर?

वहीं चाचा ने कहा कि हम उस समय यहां नहीं थे। रात में दो बजे के बाद मौके पर पहुंचे थे, सब कटे हुए पड़े थे। इसने जो किया है, वो ही भरना है। उन्होंने कहा कि दूसरा देश होता तो इसे बहुत पहले ही फांसी हो जाती। 

जानिए पूरा मामला? 
दरअसल, 15 अप्रैल 2008 काली रात को बावनखेड़ी गांव में पेशे से शिक्षक शौकत अली की इकलौती बेटी शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर ऐसी क्रूरता की, जिसे सुनकर और देखकर पूरे देश में सनसनी फैल गई। शबनम ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर माता-पिता और 10 माह के भतीजे समेत परिवार के 7 लोगों का सिर कुल्हाड़ी से काटकर घाट उतार दिया था। इस वारदात के बाद परिवार में अगर कोई बचा था तो वह शबनम और उसके पेट में पल रहा 2 माह का बेटा ही थे।

इकलौती बेटी द्वारा खूनी खेल का मंजर देखकर गांव के लोगों को शबनम से इतनी नफरत हो गई कि अब इस गांव में कोई अपनी बेटी का नाम शबनम रखना ही नहीं चाहता। यही कारण है कि तब से लेकर आज तक किसी भी बेटी का नाम शबनम नहीं रखा गया है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने शबनम को फांसी सजा सुनाई है। 
 

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