Rae Bareli News: पीड़ित को मृत दिखाकर सरकारी अभिलेखों में हेर फेर, तहसीलदार-लेखपाल तलब

Edited By Mamta Yadav,Updated: 13 Feb, 2024 02:54 PM

rae bareli news government records manipulated by showing the victim dead

सरकार द्वारा भृष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए तरह-तरह के शिकंजा कसते हुए रायबरेली में राजस्व विभाग में बीते समय कई लेखपाल व अन्य अधिकारियों को एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार कर जेल भेज दिया बावजूद जनपद में भ्रष्टाचार रुकने का नाम नहीं ले रहा...

Rae Bareli News, (शिवकेश सोनी): सरकार द्वारा भृष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए तरह-तरह के शिकंजा कसते हुए रायबरेली में राजस्व विभाग में बीते समय कई लेखपाल व अन्य अधिकारियों को एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार कर जेल भेज दिया बावजूद जनपद में भ्रष्टाचार रुकने का नाम नहीं ले रहा है। एक बार फिर जनपद के लालगंज तहसील में बड़े भ्रष्टाचार की पोल खुली जहां तहसीलदार, लेखपाल व अन्य कर्मचारियों की मदद से जमीन में हेरा फेरी का एक बड़ा मामला उजागर हुआ जिसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े कर देगा। उक्त अधिकारी कर्मचारियों ने एक पीड़ित को मृत दिखाकर उसकी जमीन को किसी अन्य दो लोगों के नाम दर्ज कर दिया। इसका खुलासा तब हुआ जब पीड़ित ने जन सूचना अधिकार के तहत सूचना न मिलने पर राज्य सूचना आयुक्त से इसकी शिकायत की।
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जानकारी के अनुसार पीड़ित की पुत्री आशा ने मीडिया को लिखित शिकायती पत्र देकर बताया कि मेरे पिताजी बुद्धी लाल ग्राम सभा पाहो के हिन्दूपुर के निवासी हैं। मेरा परिवार अम्बाला शहर में भी निवास करता है। पिताजी की जमीन जायदाद हिन्दूपुर में भी है। लम्बे समय से पाहो में कार्यरत वर्तमान लेखपाल जितेंद्र सिंह ने सरकारी अभिलेखों मे बिना सूचना दिये पिताजी बुद्धी लाल को मृत दिखाकर जमीन को 25 फरवरी 2019 को महराना व अशोक के नाम दर्ज कर दिया। जानकारी होने पर लेखपाल द्वारा जानकारी न देने पर जन सूचना अधिनियम 2005 के तहत तहसीलदार लालगंज से सूचना मांगी गयी लेकिन अभी तक उपलब्ध नहीं करवाया, जिसके तहत माननीय राज्य सूचना आयुक्त उत्तर प्रदेश को शिकायती पत्र देने के बाद लालगंज तहसीलदार को तलब किया गया। इसके साथ ही मामले से संबंधित सभी अभिलेखों को भी मंगवाया गया।
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लगभग 2 साल बीतने के बाद भी लगभग एक दर्जन सुनवाई के बाद सूचना आयुक्त की ओर से छ: आदेश दिए गए बावजूद तहसील लालगंज अपने अभिलेखों के साथ उपस्थित नहीं हुए ना ही किसके नाम जमीन दर्ज की गई उनकी पहचान उजागर की। अंतिम आदेश अपील संख्या एस 5-1482/ए/2022 के आदेशानुसार पुकार के बाद अपील करता की ओर से उनके प्रतिनिधि विवेक जैन उपस्थित हुए। प्रतिवादी पक्ष की ओर से वेद प्रकाश नायब तहसीलदार लालगंज भी उपस्थित हुए। प्रतिवादी पक्ष द्वारा शपथ पत्र पर सूचनाएं प्राप्त हुई किंतु वह भी अपूर्ण है। प्रीतिवादी पक्ष द्वारा दोबारा समय की मांग की गई। जिसमें 28 नवंबर 2023 के आदेश पर दो सप्ताह के अंदर संबंधित अभिलेख आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए। अन्यथा की स्थिति में राज सूचना आयुक्त द्वारा दोषी मानते हुए सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20(1) के तहत 250/- प्रतिदिन की दर से अर्थ धन अधिरोपित करने का आदेश दिया गया। जिस पर 29 जनवरी 2024 की अगली सुनावाई में लालगंज तहसीलदार पेश नहीं हुए उनकी जगह वर्तमान लेखपाल संतोष बिना अभिलेख के हाजिर हुए। इसके बाद माननीय राज्य सूचना आयुक्त ने फटकार लगाते हुए अंतिम सुनवाई 12 फरवरी को नियत की थी। आदेश सभी ऑनलाइन दर्ज है। अब आगे की कार्यवाही में क्या निष्कर्ष निकल कर आता है यह तो समय तय करेगा।
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पीड़ित को क्यों नहीं दी जन सूचना पर पूर्ण जानकारी
इस पूरे मामले में पीड़ित ने जमीन में हेरा फेरी की सूचना के बाद तहसीलदार, लेखपाल से जन सूचना अधिनियम के तहत पूर्ण जानकारी मांगी थी लेकिन उसे उपलब्ध नहीं करने के बाद पीड़ित ने राज्य सूचना आयुक्त का सहारा लिया, जहां लगभग 6 सुनवाई पर भी तहसीलदार लेखपाल ने दस्तावेजों की पूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं कराई वहीं तहसीलदार भी गैर हाजिर रहे। इससे साफ जाहिर होता है कि सरकारी अभिलेखों में हेरा फेरी के बाद जैसे ही पीड़ित ने जन सूचना मांगी खतौनी में फिर से पीड़ित का नाम दर्ज करने का आदेश दिया गया।

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