एकादशी पर संगम में उमड़ा आस्था का सैलाब! 50 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी, उत्साह चरम पर.... पार्किंग से लेकर मिल रहीं ये सुविधाएं

Edited By Purnima Singh,Updated: 14 Jan, 2026 01:51 PM

over nine lakh devotees took a holy dip in the ganga on ekadashi

प्रयागराज के संगम तट पर आयोजित माघ मेले के दूसरे स्नान पर्व मकर संक्रांति से पूर्व, बुधवार को एकादशी पर सुबह छह बजे तक नौ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने यहां गंगा और संगम में आस्था की डुबकी लगाई। यह जानकारी देते हुए पुलिस अधीक्षक (माघ मेला) नीरज पांडेय...

Prayagraj News : प्रयागराज के संगम तट पर आयोजित माघ मेले के दूसरे स्नान पर्व मकर संक्रांति से पूर्व, बुधवार को एकादशी पर 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने यहां गंगा और संगम में आस्था की डुबकी लगाई। यह जानकारी देते हुए पुलिस अधीक्षक (माघ मेला) नीरज पांडेय ने बताया कि आज भोर से ही स्नान प्रारंभ है। मकर संक्रांति का स्नान पर्व 15 जनवरी को है, लेकिन आज एकादशी से ही स्नान प्रारंभ है। 

मेला क्षेत्र में 10,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात 
उन्होंने कहा कि सुबह छह बजे तक नौ लाख से अधिक लोगों ने गंगा और संगम में स्नान कर लिया है। मकर संक्रांति को शाम तक यह संख्या एक से डेढ़ करोड़ श्रद्धालुओं तक जा सकती है। पांडेय ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम आवागमन के लिए पूरे मेला क्षेत्र में 10,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं। पौष पूर्णिमा स्नान पर्व पर 31 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई थी। माघ मेला-2024 में पौष पूर्णिमा पर 28.95 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान किया था। 

मेले में इन सुविधाओं को किया गया सुनिश्चित
मेला अधिकारी ऋषिराज का कहना है कि भीड़ प्रबंधन एवं सुगम यातायात के लिए इस बार 42 अस्थायी पार्किंग विकसित की गयी है। जिसमें लगभग एक लाख से अधिक वाहन पार्क हो सकेंगे। उन्होंने बताया कि माघ मेला 2025-26 में कुल 12100 फुट लंबे घाटों का निर्माण किया गया है। जिनमें सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं जैसे वस्त्र बदलने का कक्ष, शौचालय आदि उपलब्ध हैं। 

गंगा में प्रतिदिन 8000 क्यूसेक जल छोड़ा जा रहा 
मेला अधिकारी के अनुसार, माघ मेले में गंगा में जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कानपुर के गंगा बैराज से प्रतिदिन 8000 क्यूसेक जल छोड़ा जा रहा है। दारागंज में कर्मकांड कराने वाले पंडित रविशंकर मिश्रा ने कहा कि बुधवार को षट्तिला एकादशी है और इस दिन छह प्रकार से तिल का प्रयोग किया जाता है। इस दिन काली तिल और काली गाय के दान का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि एकादशी का मुहूर्त बुधवार की रात्रि नौ बजे से लेकर बृहस्पतिवार को दोपहर डेढ़ बजे तक है, लेकिन स्नान की दृष्टि से बृहस्पतिवार को पूरे दिन मकर संक्रांति का पुण्यकाल माना जाएगा। 

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