Edited By Ramkesh,Updated: 22 Nov, 2025 04:22 PM

उत्तर प्रदेश में संभल से सपा विधायक इकबाल महमूद ने बांग्लादेशी घुसपैठ और नागरिकता से जुड़े मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की नीति को कठघरे में खड़ा करते हुए कड़ा विरोध जताया। अपने आवास पर आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि देश में...
संभल: उत्तर प्रदेश में संभल से सपा विधायक इकबाल महमूद ने बांग्लादेशी घुसपैठ और नागरिकता से जुड़े मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की नीति को कठघरे में खड़ा करते हुए कड़ा विरोध जताया। अपने आवास पर आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि देश में रहने वाले सभी नागरिक यहीं रहेंगे, विदेशी बाहर भेजे जाएंगे, लेकिन इस मुद्दे को केवल मुसलमानों के खिलाफ इस्तेमाल करना राजनीति का दुर्भाग्यपूर्ण तरीका है।
मुसलमान समुदाय को टारगेट कर रही बीजेपी
विधायक महमूद ने कहा कि बीजेपी बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा उठाकर लोगों में डर पैदा कर रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि बांग्लादेश से लोगों के आने का कोई बड़ा कारण नहीं है—न रिश्तेदारी, न रोज़गार और न कोई सामाजिक संबंध। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा मुद्दा केवल मुसलमान समुदाय को टारगेट करने और ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा देने के लिए उछाला जाता है।
जो देशविरोधी गतिविधियों में शामिल है, वह सच्चा मुसलमान हो ही नहीं सकता
दिल्ली ब्लास्ट में मुस्लिम डॉक्टरों के नाम सामने आने पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक ने कहा कि जो भी व्यक्ति देशविरोधी गतिविधियों में शामिल है, वह सच्चा मुसलमान हो ही नहीं सकता। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की हरकतों से पूरा समुदाय बदनाम होता है, लेकिन भारत इतना कमजोर नहीं कि ऐसे तत्व उसे नुकसान पहुंचा सकें।
नफरत की राजनीति अधिक दिनों तक नहीं टिकेगी
विधायक महमूद ने कहा कि भारतीय मुसलमान हमेशा देशभक्त रहा है और रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि नफरत की राजनीति अधिक दिनों तक नहीं टिकेगी और देश की जनता एक दिन सच को पहचानेगी। 85 करोड़ लोगों को मिलने वाले मुफ्त राशन पर उन्होंने कहा कि यह सुविधा संविधान के आधार पर दी जाती है, धर्म के आधार पर नहीं। किसी धर्म विशेष को लाभ या वंचित करने का अधिकार किसी सरकार को नहीं है।
भारत की असली पहचान आपसी भाईचारे से रही है
उन्होंने कहा कि 2014 के बाद धार्मिक ध्रुवीकरण बढ़ा है, जबकि भारत की असली पहचान सदियों से आपसी भाईचारे की रही है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इलाहाबाद कुंभ में जब भगदड़ मची थी, मुसलमानों ने अपने घरों और धार्मिक स्थलों के दरवाजे सभी के लिए खोले थे। वहां धर्म नहीं, इंसानियत ही दिख रही थी।