ईद उल अजहा के अवसर पर इस्लामिक सेंटर ने जारी किए कुछ एडवाइजरी, कहा- ऐसा काम न करें जिस से शर्मिंदगी उठानी पड़े

Edited By Tamanna Bhardwaj, Updated: 07 Jul, 2022 03:49 PM

islamic center issued some advisories on the occasion of eid ul adha

फिरोजाबाद: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में मौलाना आलम मुस्तफा याकूबी ने ईद उल अजहा के अवसर पर कुर्बानी से संबंधित इस्लामिक सेंटर के जरिए 10 एडवाइजरी जारी की है।

फिरोजाबाद: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में मौलाना आलम मुस्तफा याकूबी ने ईद उल अजहा के अवसर पर कुर्बानी से संबंधित इस्लामिक सेंटर के जरिए 10 एडवाइजरी जारी की है। इस्लामिक सेंटर गत वर्षों से विभिन्न अवसरों पर इबादत जैसे कि नमाज, रोजा, जकात हज, कुर्बानी से संबंधित तमाम मुस्लिम समाज के लिए एडवाइजरी जारी करता रहा है ।

बता दें कि कुछ दिन के बाद बकरीद आने वाली है। इस त्योहार पर कुर्बानी की जाती है। मुस्लिम गुरुओं ने मुसलमानों के लिए कुरान हदीस की रोशनी में 10 एडवाइजरी जारी की है। यह भी उम्मीद लगाई है कि मुस्लिम समाज इसका ख्याल रखेगा। एक अच्छा और आदर्श मुसलमान होने का सबूत देगा।

निम्न एडवाइजरी है --
1. कुर्बानी हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की सुन्नत और अल्लाह का हुक्म है। यह कोई रसम नहीं है। इस पर मोहम्मद साहब ने अमल किया है और अपनी उम्मत को भी इस पर अमल करने का हुक्म दिया है।

2.कुर्बानी के दिनों में अल्लाह को कुर्बानी से बढ़कर कोई और अमल पसंद नहीं, इसलिए मुस्लिम समाज को ईद उल अजहा (बकरीद ) के अवसर पर जहां तक मुमकिन हो कुर्बानी करने की कोशिश करनी चाहिए।

3.ईद उल अजहा (बकरीद) के मौके पर कुर्बानी के जानवर की फोटो और वीडियो हरगिज सोशल मीडिया पर न डालें।

4. कुर्बानी का बदला- सदका, खैरात और गरीबों की मदद या कोई दूसरा नेक काम नहीं हो सकता ।

5. जिन लोगों पर कुर्बानी वाजिब हो वह ख्वाहिश और कोशिश के बावजूद अपनी जगह पर कुर्बानी न कर सकें तो वह दूसरी जगह पर अपनी कुर्बानी अदा कराएं। अगर यह  मुमकिन नहीं तो कुर्बानी के दिन गुजरने के बाद कुर्बानी के बराबर रकम गरीबों में सदका कर दें।

6. मुस्लिम समाज कोई ऐसा काम न करें जिस से पुरे मुस्लिम समाज को शर्मिंदगी उठानी पड़े। 

7. कुर्बानी सड़कों पर खुले में न करें, प्रतिबंधित जगहों में न करें, प्रतिबंधित जानवर की कुर्बानी न करें। जिससे किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे। साथ ही सफाई का भी खास ख्याल रखें।

8.नमाज़ ईद उल अजहा वाजिब है। जिसमे एक रास्ते से जाना दूसरे रास्ते से आना सुन्नत है।

9. सभी फर्ज़ नमाज़ के बाद चांद की 9 तारीख से 13 तारीख तक तकबीर तशरीक पढ़ें। यह पढ़ना वाजिब है मर्द और औरतें इसका एहतिमाम करें।

10. ईद उल अजहा के दिन डीजे बजाना, गाने बजाना, रास्ता रोकना और किसी पड़ोसी को तकलीफ देना इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता ।

 

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