‘जूते से मारूंगा, FIR भी करूंगा’… बहराइच में कांग्रेस जिलाध्यक्ष को SHO ने धमकाया, विपक्ष ने उठाए सवाल

Edited By Mamta Yadav,Updated: 10 Sep, 2025 10:52 PM

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जिले के रमवापुर चौराहे पर सोमवार को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिवेंद्र प्रताप सिंह और रानीपुर थाना प्रभारी ब्रह्म गोंड के बीच तीखी झड़प हो गई। यह विवाद उस समय गहराया जब शिवेंद्र प्रताप सिंह गरीब दुकानदारों की ढावली...

Bahraich News: जिले के रमवापुर चौराहे पर सोमवार को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिवेंद्र प्रताप सिंह और रानीपुर थाना प्रभारी ब्रह्म गोंड के बीच तीखी झड़प हो गई। यह विवाद उस समय गहराया जब शिवेंद्र प्रताप सिंह गरीब दुकानदारों की ढावली तोड़े जाने का विरोध कर रहे थे। इस दौरान मौके पर पहुंचे SHO ने कथित तौर पर कांग्रेस नेता को जूते से मारने और FIR दर्ज करने की धमकी दे डाली। इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसे लेकर यूपी कांग्रेस ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला है।

क्या है पूरा मामला?
सोमवार को प्रशासनिक टीम अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रही थी। कांग्रेस जिलाध्यक्ष अपने कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचे और कार्रवाई पर आपत्ति जताई। इसी दौरान SHO ब्रह्म गोंड मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया। वीडियो में SHO को कथित तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है – "जूते से मारूंगा और FIR भी करूंगा।"

राजनीतिक संग्राम: कांग्रेस ने उठाए सवाल

यूपी कांग्रेस ने इस वीडियो को X (पूर्व में ट्विटर) पर साझा करते हुए लिखा, "बहराइच के SHO को बीजेपी सांसद-विधायक का संरक्षण प्राप्त है। पुलिस कांग्रेस नेताओं को खुलेआम धमकाने में जुटी है।" कांग्रेस ने इस घटना को लोकतंत्र और विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश बताया है।

जिलाध्यक्ष की प्रतिक्रिया और मांग
कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिवेंद्र प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने चुनिंदा तरीके से एक ही ढावली को निशाना बनाकर तोड़ा, जबकि अन्य ढाबलियों को नहीं हटाया गया। उन्होंने SHO पर अभद्र व्यवहार और लोकतांत्रिक मर्यादा के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए विभागीय कार्रवाई की मांग की है।

SHO का पक्ष
थाना प्रभारी ब्रह्म गोंड ने सफाई देते हुए कहा कि मौके पर अतिक्रमण की शिकायत पर कार्रवाई की जा रही थी। "सिर्फ एक दुकान के आगे रखी ढावली को समझा-बुझाकर हटाया गया। जिलाध्यक्ष जबरन उसे दोबारा लगवाने पर अड़े थे, जिससे विवाद हुआ।"

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