Edited By Anil Kapoor,Updated: 24 Sep, 2026 06:18 AM

अपनों की हंसी-खुशी से चहकने वाला एक घर चंद घंटों में ऐसा उजाड़ होगा, किसी ने सोचा भी नहीं था। आजमगढ़ में 8 घंटे तक चले मौत के तांडव और पुलिस एनकाउंटर का अंत बेहद हृदयविदारक तस्वीरों के साथ हुआ। राजघाट शवदाह गृह पर जब एक ही परिवार के 3 शव आरोपी पति,...
Azamgarh News: अपनों की हंसी-खुशी से चहकने वाला एक घर चंद घंटों में ऐसा उजाड़ होगा, किसी ने सोचा भी नहीं था। आजमगढ़ में 8 घंटे तक चले मौत के तांडव और पुलिस एनकाउंटर का अंत बेहद हृदयविदारक तस्वीरों के साथ हुआ। राजघाट शवदाह गृह पर जब एक ही परिवार के 3 शव आरोपी पति, उसकी पत्नी और मासूम बेटे एक साथ पहुंचे, तो वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा कांप उठा।
मिली जानकारी के मुताबिक, पूरी त्रासदी तब शुरू हुई जब सिरफिरे अरविंद सिंह ने अपनी पत्नी और 2 पुजारियों की बेरहमी से हत्या कर दी। इसके बाद उसने अपने ही बच्चों को घर में बंधक बना लिया। मौके पर पहुंची पुलिस करीब 8 घंटे तक आरोपी की मिन्नतें करती रही, लेकिन वह बच्चों को छोड़ने को तैयार नहीं हुआ। जब पुलिस ने घेराबंदी सख्त की, तो सनकी पिता ने अपने ही 10 साल के मासूम बेटे को गोली मार दी।
गोली की आवाज सुनते ही पुलिस ने स्टेन ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले छोड़कर घर में एंट्री की। खुद को घिरता देख आरोपी अरविंद ने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से ताबड़तोड़ 6 राउंड फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली लगने से आरोपी ढेर हो गया। गनपॉइंट पर रखी गई बेटी और हाथ से छूटे छोटे बच्चे को पुलिस ने किसी तरह सुरक्षित बचाकर अस्पताल पहुंचाया।
इस खौफनाक वारदात का सबसे कारुणिक मोड़ राजघाट पर देखने को मिला। आरोपी के बड़े भाई की साल 2018 में ही हत्या हो चुकी थी, जिससे परिवार में मुखाग्नि देने के लिए कोई पुरुष सदस्य बचा ही नहीं था। आखिर में आरोपी की भतीजी कुमारी वर्षा को आगे आना पड़ा। चीख-पुकार और सिसकियों के बीच वर्षा ने जब अपने चाचा, चाची और चचेरे भाई को एक साथ मुखाग्नि दी, तो वहां खड़े हर इंसान की आंखें नम हो गईं।