Edited By Anil Kapoor,Updated: 23 Sep, 2026 08:55 AM

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर होने वाले आरक्षण-समर्थक प्रदर्शन से ठीक 2 दिन पहले आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी को बड़ा झटका दिया है। पार्टी प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने दावा किया है कि पुलिस ने 24 सितंबर को होने वाले उनके एक दिवसीय संपूर्ण...
Lucknow News: दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर होने वाले आरक्षण-समर्थक प्रदर्शन से ठीक 2 दिन पहले आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी को बड़ा झटका दिया है। पार्टी प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने दावा किया है कि पुलिस ने 24 सितंबर को होने वाले उनके एक दिवसीय संपूर्ण भागीदारी महाआंदोलन की अनुमति को आखिरी वक्त में रद्द कर दिया है। हालांकि, अनुमति न मिलने के बावजूद चंद्रशेखर आजाद ने पीछे हटने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने सरकार के इस रुख के खिलाफ अब देशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।
अनुमति रद्द होने की जानकारी सामने आने के बाद चंद्रशेखर आजाद ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक वीडियो संदेश जारी कर दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि हमने करीब 20 दिन पहले ही प्रदर्शन की इजाजत के लिए आवेदन दे दिया था। हमें लगातार आश्वासन दिया जा रहा था कि अनुमति मिल जाएगी। लेकिन कार्यक्रम से महज 2 दिन पहले हम पर यह मनमाना आदेश थोप दिया गया।
ये भी पढ़ें:- पिता ने घर में किया बंद, तो कोर्ट पहुंची बेटी: इलाहाबाद HC ने पिता के चंगुल से छुड़ाकर मुस्लिम पति को सौंपी बालिग पत्नी
आजाद ने आगे खुलासा करते हुए कहा कि हमने पुलिस से आग्रह किया था कि अगर जंतर-मंतर पर जगह नहीं है तो हमें रामलीला मैदान में प्रदर्शन की इजाजत दे दी जाए, लेकिन उसे भी खारिज कर दिया गया। इतना ही नहीं, हमें चेतावनी दी गई है कि अगर हम बिना इजाजत के संवैधानिक तरीके से भी आगे बढ़े, तो हमारे खिलाफ कानूनी मुकदमे दर्ज किए जाएंगे। देश में इस वक्त अघोषित आपातकाल जैसे हालात हैं। सरकार को सीधे चेतावनी देते हुए भीम आर्मी प्रमुख ने कहा कि कुछ लड़ाइयां बड़े बलिदानों की मांग करती हैं और वे हर तरह की कुर्बानी देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
जंतर-मंतर की रैली रद्द होने के बाद आजाद समाज पार्टी ने अपनी रणनीति बदल दी है। चंद्रशेखर आजाद ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील की है कि 24 सितंबर को दिल्ली पहुंचने के बजाय अब देश भर के हर जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया जाए और सरकार को इसकी भाषा में जवाब दिया जाए। गौरतलब है कि आजाद समाज पार्टी पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर '24 सितंबर चलो जंतर-मंतर' अभियान चला रही थी, जिसे लेकर समर्थकों में भारी उत्साह देखा जा रहा था।
24 सितंबर की तारीख ही क्यों?
इस प्रदर्शन के लिए 24 सितंबर की तारीख का चुना जाना महज एक इत्तेफाक नहीं है, बल्कि इसका गहरा ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व है। दरअसल, 24 सितंबर 1932 को ही ऐतिहासिक पूना पैक्ट पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह समझौता राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और वंचितों-शोषितों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले डॉ. बी.आर. अंबेडकर के बीच हुआ था। इस समझौते के तहत दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र की मांग के बदले संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र प्रणाली के तहत आरक्षित सीटों का प्रावधान लागू किया गया था। आरक्षण और सामाजिक न्याय की लड़ाई में पूना पैक्ट का दिन बेहद खास माना जाता है, यही वजह है कि चंद्रशेखर आजाद ने इस ऐतिहासिक दिन को अपनी बहुजन अधिकारों की आवाज बुलंद करने के लिए चुना था।
प्रदर्शन की अनुमति रद्द होने और चंद्रशेखर आजाद द्वारा जिला स्तरीय आंदोलनों के आह्वान के बाद अब पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क मोड में आ गया है। 24 सितंबर को विभिन्न राज्यों के जिला मुख्यालयों पर समर्थकों की भारी भीड़ जुटने की संभावना है, जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है।