'बच्चों को नदी में फेंका नहीं गया था...' HC ने रद्द की फां/सी की सजा, 3 मासूमों के क/त्ल में मां और प्रेमी बरी

Edited By Anil Kapoor,Updated: 24 Sep, 2026 08:04 AM

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने 3 बच्चों की हत्या के मामले में फांसी की सजा पाने वाली एक महिला को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे उसका अपराध साबित करने में विफल रहा है। अदालत ने कहा कि 8 वर्षीय जीवित बचे बच्चे की गवाही...

Prayagraj News: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने 3 बच्चों की हत्या के मामले में फांसी की सजा पाने वाली एक महिला को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे उसका अपराध साबित करने में विफल रहा है। अदालत ने कहा कि 8 वर्षीय जीवित बचे बच्चे की गवाही में ऐसे विरोधाभास हैं जिन्हें दूर नहीं किया जा सकता और उसमें स्पष्ट रूप से सिखाए गए बयान के संकेत दिखाई देते हैं।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की पीठ ने मंगलवार को प्रियंका और उसके कथित साथी एवं मृत बच्चों के पिता के छोटे भाई आशीष उर्फ डैनी की दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया। निचली अदालत ने प्रियंका को फांसी की सजा सुनाई थी, जबकि आशीष को आजीवन कारावास की सजा दी गई थी। उच्च न्यायालय ने दोनों को बरी करते हुए निर्देश दिया कि यदि वे किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। यह मामला 3 बच्चों माधव उर्फ गुंगा (6), आदित्य उर्फ टिल्ला (5) और मंगल (4) की मौत से जुड़ा है। तीनों के शव 27 जून, 2024 को औरैया में सेंगुर नदी से बरामद किए गए थे।

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प्राथमिकी के अनुसार, प्रियंका ने आशीष के साथ मिलकर अपने चारों बेटों को सुबह करीब 5 बजे सेंगुर नदी पर बने पुल पर ले गई थी। आरोप था कि दोनों अपने संबंध जारी रखने के लिए बच्चों से छुटकारा पाना चाहते थे। आरोप था कि उन्होंने चारों बच्चों को डुबोने का प्रयास किया, लेकिन सबसे बड़ा बेटा सोनू बच गया, जबकि अन्य 3 बच्चों की मौत हो गई। सोनू के अनुसार, एक ग्राम प्रधान उसे अपने घर ले गए, जहां उसने घटना की जानकारी दी। इसके बाद प्रधान ने पुलिस को सूचना दी। उसने यह भी बताया था कि प्राथमिकी दर्ज कराने वाला मनीष उसका चाचा है और उसने उसे घटना के बारे में बताया था, जिसके बाद मनीष ने प्राथमिकी दर्ज कराई।

हालांकि, प्राथमिकी दर्ज कराने वाले मनीष ने अलग बयान दिया। उसने कहा कि मौतों की जानकारी ग्राम प्रधान ने पुलिस को दी थी और उसे भी वहीं से सूचना मिली थी, न कि बच्चे से। उसने यह भी कहा कि उसे यह नहीं पता था कि घटना की जानकारी देने वाला व्यक्ति कौन था। उच्च न्यायालय ने दोनों आरोपियों की अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें आशीष को आजीवन कारावास और प्रियंका को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 के तहत फांसी की सजा सुनाई गई थी।

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