'मंगल पांडेय का बलिदान हमेशा प्रेरणा देगा', महानायक की जयंती पर CM Yogi ने किया नमन, कई BJP नेताओं ने भी दी श्रद्धांजलि

Edited By Purnima Singh,Updated: 19 Jul, 2026 11:46 AM

cm yogi paid tribute on mangal pandey s birth anniversary

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष पंकज चौधरी सहित कई प्रमुख नेताओं ने रविवार को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक मंगल पांडेय की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की ...

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष पंकज चौधरी सहित कई प्रमुख नेताओं ने रविवार को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक मंगल पांडेय की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। योगी आदित्यनाथ ने 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, ''प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत, अमर क्रांतिवीर मंगल पांडेय की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि।'' मुख्यमंत्री ने कहा, ''उन्होंने विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष की ऐसी अलख जगाई, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन को नयी दिशा प्रदान की। मातृभूमि के लिए उनका सर्वोच्च बलिदान राष्ट्र को सदैव प्रेरित करता रहेगा।'' 

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, ''1857 की क्रांति के अग्रदूत एवं भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम महानायक मंगल पांडेय की जयंती पर उन्हें सादर नमन।'' उन्होंने कहा, ''मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए आपका अद्वितीय साहस, त्याग और बलिदान राष्ट्र के इतिहास में सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा।'' उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 'एक्स' पर लिखा, ''1857 में क्रांति का शंखनाद करने वाले भारत माता के वीर सपूत, अमर शहीद मंगल पांडेय की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन।'' उन्होंने कहा, ''राष्ट्र की स्वाधीनता के लिए समर्पित उनका सर्वोच्च बलिदान हर भारतीय के जीवन में सदैव देशभक्ति की अलख जगाता रहेगा।'' 

मंगल पांडेय ने 1857 में ब्रिटिश अधिकारियों के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल फूंका था, जिसके बाद देश के विभिन्न हिस्सों में अंग्रेजी शासन के खिलाफ स्वतंत्रता की आवाज बुलंद होने लगी। इस विद्रोह को भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत माना जाता है। मंगल पांडेय का जन्म 19 जुलाई 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया में हुआ था। वर्ष 1857 में ब्रिटिश शासन ने उन्हें फांसी दे दी थी। उनका साहस, बलिदान और राष्ट्रभक्ति भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे। 
 

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