भारत रत्न डॉ़ भीमराव अम्बेडकर की 132वीं जयंती आज, बुंविवि में लगाई गई चित्र प्रदर्शनी

Edited By Tamanna Bhardwaj,Updated: 14 Apr, 2022 06:30 PM

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उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित बुंदेलखंड विश्वविद्यालय (बुंविवि) में भारत रत्न डॉ़ भीमराव अम्बेडकर की 132वी जयंती पर गुरुवार को चित्र प्रदर्शनी के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की गई। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी के ललित...

झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित बुंदेलखंड विश्वविद्यालय (बुंविवि) में भारत रत्न डॉ़ भीमराव अम्बेडकर की 132वी जयंती पर गुरुवार को चित्र प्रदर्शनी के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की गई। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी के ललित कला संस्थान के 75 विद्यार्थियों ने आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में चित्रों के माध्यम से डॉ़. अंबेडकर को याद किया। इस अवसर पर चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन कर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो. एस. पी. सिंह ने कहा कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संपूर्ण जीवन निस्वार्थ सेवा कर राष्ट्रहित अर्पण कर दिया। उन्होंने जन जागरण के माध्यम से आने वाली पीढ़ी के सम्मुख अपने जीवन वृत से उदहारण प्रस्तुत किया।    

उन्होंने छात्रों द्वारा बनाए चित्रों की प्रशंसा करते हुए कहा कि चित्र अपने आप में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। मुख्य अतिथि के रूप में पधारे विनय कुमार सिंह, कुलसचिव ने कहा कि संस्थान के विद्यार्थियों ने बाबासाहब के जीवन से संबंधित चित्रों में जो अभिव्यक्ति प्रस्तुत की वह सराहनीय है उनके कार्यो से हमें समाज हित, देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करना चाहिए।

विशिष्ट अतिथि राजबहादुर सिंह, परीक्षा नियंत्रक ने भारत रत्न अंबेडकर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित चित्रों की प्रशंसा करते हुए कहा कि जो भी चित्र बने हैं अपनी मौलिकता लिए है। बाबा साहब आज हमारे लिए प्रेरणा के स्रोत हैं जिन कठिन परिस्थितियों में संघर्ष कर उन्होंने अपना मुकाम हासिल किया वंदनीय है। कार्यक्रम में प्रो. सुनील काबिया ,अधिष्ठाता छात्र कल्याण ने कहा कि जन जागरण के माध्यम से हमें संविधान की जानकारी और हमारे देश के प्रति नैतिक कर्तव्य की जानकारी जनमानस तक पहुचाना आवश्यक है जिसके अभाव में गलत कार्य हो जाते हैं।  इस अवसर पर सुनील कुमार सिंह ,सहायक कुलसचिव प्रो. प्रोफेसर डी.के. भट्ट संपत्ति अधिकारी, प्रो. आर. के. सैनी कुलानुशासक, डॉ कौशल त्रिपाठी, आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
 

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