लखनऊ में ऑटिज्म डे पर लगा जागरूकता कैंप, ‘समझो-पहचानो-बदलो’ कार्यक्रम का हुआ आयोजन

Edited By Purnima Singh,Updated: 03 Apr, 2026 03:34 PM

awareness camp held in lucknow on autism day

विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस के अवसर पर सीतापुर-हरदोई रोड स्थित हाइजिया इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च में हाइजिया ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस ने द होप फाउंडेशन के सहयोग से एचसीओपी सेमिनार हॉल में 'समझो, पहचानो, बदलो' जागरूकता कार्यक्रम...

लखनऊ : विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस के अवसर पर सीतापुर-हरदोई रोड स्थित हाइजिया इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च में हाइजिया ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस ने द होप फाउंडेशन के सहयोग से एचसीओपी सेमिनार हॉल में 'समझो, पहचानो, बदलो' जागरूकता कार्यक्रम एवं नि:शुल्क डेवलपमेंट असेसमेंट कैंप का आयोजन किया। 

गुरुवार को आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने समाज में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (न्यूरोडाइवर्स) के प्रति जागरूकता बढ़ाने, विकास संबंधी विलंब की समय रहते पहचान करने और व्यवहार, भाषा एवं सीखने से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अपने विचार रखे। साथ ही ऐसे बच्‍चों के सर्वांगीण विकास में फार्मेसी की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

‘ऑटिज्म बीमारी नहीं, सोच का अलग तरीका’
द होप सेंटर के एमडी दिव्यांशु कुमार ने बताया कि ऑटिज़्म कोई बीमारी नहीं, बल्कि मस्तिष्क के विकास का एक अलग तरीका है। भारत में बड़ी संख्या में बच्चे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, एडीएचडी, इंटेलेक्चुअल डिसेबिलिटी और सेरेब्रल पाल्सी जैसी न्यूरोडेवलपमेंटल स्थितियों से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि 3 वर्ष से पूर्व की पहचान (अर्ली इंटरवेंशन) बच्चे को मुख्यधारा के स्कूलों से जोड़ने में जादुई असर दिखाती है। उन्होंने फार्मेसी छात्रों से अपील की कि दवाइयों की सही डोज, स्टोरेज और साइड इफेक्ट्स की जानकारी देकर वे परिवारों की यात्रा को आसान बना सकते हैं।

विशेषज्ञों ने दिया बड़ा संदेश
वहीं, हाइजिया इंस्‍टीट्यूट के फार्मेसी विभाग की एचओडी डॉ. अवनि गुप्ता ने रिसपेरिडोन और मेथिलफेनिडेट जैसी दवाओं की फार्माकोलॉजिकल भूमिका, संभावित साइड इफेक्ट्स तथा पॉलीफार्मेसी के जोखिमों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार फार्मासिस्ट को प्रिस्क्रिप्शन के पीछे की मानवीय संवेदनाओं को भी समझना चाहिए। फार्मासिस्ट की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि दवाओं के साइड इफेक्ट्स और ड्रग इंटरैक्शन की निगरानी करना बेहद जरूरी है। 

बच्चों का फ्री असेसमेंट
दो सत्रों में आयोजित इस कैंप में विशेषज्ञों की टीम ने बच्चों का नि:शुल्क मूल्यांकन कर अभिभावकों को परामर्श दिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ऑफिसर भावना सिंह, डॉ. संजय कुमार और फार्म डी के छात्र-छात्राओं का विशेष योगदान रहा।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!