घूसखोर दरोगा ने जीरो टॉलरेंस की नीति को लगाया पलीता, नहीं मिली 90 हजार रुपये की रिश्वत तो 12 निर्दोष फंसा दिए?

Edited By Ramkesh,Updated: 11 Jan, 2026 03:57 PM

a corrupt inspector ruined the zero tolerance policy when he did not get

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने के बावजूद जमीनी स्तर पर कुछ पुलिसकर्मियों की कार्यशैली लगातार सवालों के घेरे में आ रही है। ताजा मामला कानपुर जिले के नरवल थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक...

कानपुर: उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने के बावजूद जमीनी स्तर पर कुछ पुलिसकर्मियों की कार्यशैली लगातार सवालों के घेरे में आ रही है। ताजा मामला कानपुर जिले के नरवल थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक दारोगा पर गंभीर भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं।

12 निर्दोष लोगों को आरोपी बना दिया
नरवल थाने में तैनात दारोगा संदीप कुमार पर आरोप है कि उन्होंने दहेज उत्पीड़न के एक मामले में पीड़ित पक्ष से केस में राहत देने के बदले 90 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। पीड़ित का आरोप है कि जब उसने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई, तो दारोगा ने बदले की भावना से कार्रवाई करते हुए जानबूझकर 12 निर्दोष लोगों को आरोपी बना दिया।

ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल 
मामला उस समय तूल पकड़ गया जब दारोगा द्वारा रिश्वत मांगने से जुड़ा एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल ऑडियो में कथित तौर पर दारोगा संदीप कुमार पैसों की मांग करते हुए साफ तौर पर सुने जा सकते हैं। ऑडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और मामले की जांच शुरू की गई।

दारोगा संदीप कुमार निलंबित
उच्च अधिकारियों ने वायरल ऑडियो का संज्ञान लेते हुए प्राथमिक जांच कराई, जिसमें प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए। इसके बाद पुलिस विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दारोगा संदीप कुमार को निलंबित कर दिया। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं और भ्रष्टाचार से जुड़े पहलुओं की भी गहराई से पड़ताल की जा रही है।

आरोपी के खिलाफ जांच शुरु 
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और यदि आरोप पूरी तरह साबित होते हैं तो आरोपी दारोगा के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस घटना के सामने आने के बाद आम लोगों के बीच पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि जीरो टॉलरेंस की नीति के बावजूद भ्रष्टाचार पर पूरी तरह अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभागीय जांच के बाद दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ कितनी सख्त कार्रवाई होती है।

 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!