Edited By Ramkesh,Updated: 14 Jan, 2026 03:17 PM

देशभर में 18,000 से अधिक स्नातकोत्तर मेडिकल सीट खाली रहने के कारण, राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान बोर्ड (एनबीईएमएस) ने नीट-पीजी 2025 प्रवेश के लिए अर्हता पर्सेंटाइल को संशोधित किया है। संशोधित व्यवस्था के तहत आरक्षित श्रेणियों के लिए पर्सेंटाइल को 40 से...
यूपी डेस्क: देशभर में 18,000 से अधिक स्नातकोत्तर मेडिकल सीट खाली रहने के कारण, राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान बोर्ड (एनबीईएमएस) ने नीट-पीजी 2025 प्रवेश के लिए अर्हता पर्सेंटाइल को संशोधित किया है। संशोधित व्यवस्था के तहत आरक्षित श्रेणियों के लिए पर्सेंटाइल को 40 से घटाकर शून्य कर दिया गया है। मंगलवार को एनबीईएमएस द्वारा प्रकाशित नोटिस के अनुसार, सामान्य श्रेणी के लिए नीट पीजी का कटऑफ 50 पर्सेंटाइल से घटाकर सात पर्सेंटाइल कर दिया गया है। यह निर्णय दो दौर की काउंसलिंग पूरी होने के बाद लिया गया है।

प्रशिक्षित चिकित्सा विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने के लिए उठाया गया कदम
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस संशोधन का उद्देश्य उपलब्ध सीटों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है, जो भारत में प्रशिक्षित चिकित्सा विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सूत्रों ने कहा कि ऐसी सीटों का खाली रहना स्वास्थ्य सेवा में सुधार के प्रयासों को कमजोर करता है और बहुमूल्य शैक्षिक संसाधनों की हानि का कारण बनता है।
काउंसलिंग के माध्यम से पारदर्शी और मेरिट आधारित अभ्यर्थियों सीट देना
नीट-पीजी एक रैंकिंग व्यवस्था के रूप में काम करता है, जिसका उद्देश्य केंद्रीकृत काउंसलिंग के माध्यम से सीटों का पारदर्शी और मेरिट आधारित आवंटन सुनिश्चित करना है। हालांकि, पहले लागू पर्सेंटाइल की सीमा के कारण सीटों की उपलब्धता के बावजूद योग्य अभ्यर्थियों का दायरा सीमित रह गया था।
खाली सीटों को भरना और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का उद्देश्य
आधिकारिक सूत्रों ने प्रमुख बिंदुओं को रेखांकित करते हुए कहा कि दाखिले पूरी तरह से मेरिट आधारित रहेंगे और इनका निर्धारण नीट-पीजी रैंक तथा अभ्यर्थियों की वरीयताओं के आधार पर किया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि आवंटन केवल अधिकृत काउंसलिंग व्यवस्था के जरिए ही किए जाएंगे और किसी भी तरह के सीधे या विवेकाधीन दाखिले की अनुमति नहीं होगी। भारतीय चिकित्सा आयोग (आईएमए) ने सीटों के बेकार होने से रोकने और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत का हवाला देते हुए 12 जनवरी को औपचारिक रूप से ‘क्वालिफाइंग कट-ऑफ' में संशोधन का अनुरोध किया था।