'आज वोट कटेंगे, कल बैंक अकाउंट!'—अखिलेश यादव ने SIR को लेकर BJP पर साधा निशाना, देश में मचा हड़कंप!

Edited By Anil Kapoor,Updated: 28 Nov, 2025 02:33 PM

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UP Politics News: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान पर कड़ी आलोचना की है। बीते गुरुवार की शाम उन्होंने अपने आधिकारिक X (पूर्व...

UP Politics News: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान पर कड़ी आलोचना की है। बीते गुरुवार की शाम उन्होंने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट कर इसे 'देश के खिलाफ बड़ी साजिश' बताया और चेतावनी दी कि यह प्रक्रिया देश को औपनिवेशिक युग से भी बदतर हालात में ले जा सकती है।

बीजेपी और NDA पर निशाना
मिली जानकारी के मुताबिक, अखिलेश यादव ने कहा कि SIR सिर्फ मतदाता सूची का अपडेट नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा तंत्र है जो धीरे-धीरे आम लोगों के अधिकारों को छीन सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज वोट काटे जा रहे हैं, कल जमीन के रिकॉर्ड, राशन कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, आरक्षण, और फिर बैंक अकाउंट और लॉकर तक में हस्तक्षेप किया जाएगा। उन्होंने सिर्फ भाजपा को ही नहीं, बल्कि NDA में शामिल छोटे दलों को भी इस 'मेगा साजिश' के खिलाफ एकजुट होने की अपील की। अखिलेश ने कहा कि यह देश के लोगों के खिलाफ सबसे बड़ा षड्यंत्र है। अब जागने का समय है। इसे रोकने के लिए सभी को साथ आना होगा।

'चुनावी तंत्र' पर कब्जे का आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भाजपा और उसके सहयोगी चुनावी तंत्र पर कब्जा करने की योजना बना रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव आयोग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मदद से मतदाता सूचियों में हेराफेरी की जा रही है। अखिलेश ने चेतावनी दी कि NDA में खड़े छोटे दलों को 'सबसे पहले समाप्त किया जाएगा।' उन्होंने यह भी कहा कि वोट किसी नागरिक की पहचान है और यदि वोट ही खतरे में हैं, तो लोकतंत्र की आत्मा पर सीधा हमला हो रहा है।

SIR प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति
SIR प्रक्रिया फिलहाल नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही है। चुनाव आयोग ने बताया कि उनके बूथ स्तर के अधिकारी (BLOs) घर-घर जाकर मतदाता फॉर्म वितरित कर रहे हैं और लोगों को आवश्यक दस्तावेज भरने में सहायता कर रहे हैं। अखिलेश यादव का यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है और इसे लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों पर संभावित खतरे के रूप में देखा जा रहा है।

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