मंदिर में अश्लील डांस का Video Viral होते ही मचा हड़कंप, पुलिस बोली- 'AI से बना है फर्जी वीडियो'

Edited By Anil Kapoor,Updated: 30 Sep, 2026 07:49 AM

of obscene dance in temple goes viral police say it was ai generated

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में लाट भैरव मंदिर परिसर में एक धार्मिक आयोजन के दौरान 2 युवतियों के कथित अश्लील नृत्य का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उपजे विवाद के बीच पुलिस ने संबंधित सामग्री को मंगलवार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) टूल से...

Varanasi News: उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में लाट भैरव मंदिर परिसर में एक धार्मिक आयोजन के दौरान 2 युवतियों के कथित अश्लील नृत्य का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उपजे विवाद के बीच पुलिस ने संबंधित सामग्री को मंगलवार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) टूल से निर्मित बताया। पुलिस ने दावा किया कि भ्रामक वीडियो प्रसारित कर पुलिस की छवि खराब करने का प्रयास किया गया है और ऐसा करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा। यह वीडियो बाबा लाट भैरव की वार्षिक बारात से जुड़े धार्मिक आयोजन का बताया गया है और इसके सामने आने के बाद विभिन्न वर्गों ने सवाल उठाए हैं। वीडियो में घाघरा और बिना आस्तीन वाली चोली पहने दो महिलाएं भोजपुरी गीतों पर कथित तौर पर अश्लील नृत्य करती दिखाई दे रही हैं। कुछ लोगों ने वीडियो में नजर आ रहे पुलिसकर्मियों के आचरण पर सवाल उठाए हैं।

 

समाजवादी पार्टी के मीडिया प्रकोष्ठ ने भी वीडियो को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उसने 'एक्स' पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के शासन में मंदिर परिसरों और धार्मिक आयोजनों में भी अश्लील गीत, नृत्य और भद्दी प्रस्तुतियां हो रही हैं। सपा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी जिन मूल्यों, परंपराओं, आचरण और चरित्र की बात करती है, उन पर ऐसे घटनाक्रमों से सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, मंदिर से जुड़े लोगों ने कहा कि ऐसा नृत्य पारंपरिक रूप से बाबा लाट भैरव की बारात का हिस्सा रहा है। उन्होंने कहा कि वार्षिक आयोजन में नगर वधुओं के नृत्य प्रस्तुति देने की परंपरा रही है।

इस साल 5 दिवसीय बाबा लाट भैरव बारात समारोह 23 से 27 सितंबर तक आयोजित हुआ। इसे बाबा लाट भैरव और देवी भैरवी के दिव्य विवाह का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक अनुष्ठानों के तहत मुख्य मंदिर से विवाह सामग्री लेकर श्रद्धालुओं का जुलूस विभिन्न स्थानों से गुजरते हुए मंदिर पहुंचता है। हालांकि, सनातन रक्षक दल के अध्यक्ष अजय शर्मा ने दावा किया कि इस तरह की प्रस्तुतियां पिछले कुछ वर्षों में शुरू हुई हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थल पर कार्यक्रम होना हो तो शास्त्रीय संगीत जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम होने चाहिए और धर्म के नाम पर अश्लीलता के लिए कोई जगह नहीं है।

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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्व महासचिव विकास सिंह ने वीडियो में पुलिसकर्मियों के कथित आचरण पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। विवाद बढ़ने के बाद पुलिस ने अपने बयान में कहा कि उक्त वीडियो एआई से तैयार किया गया है। इसे पुलिस की छवि खराब करने के मकसद से प्रसारित किया जा रहा है। पुलिस ने कहा कि भ्रामक वीडियो प्रसारित करने के आरोप में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

धर्मेंद्र राजभर नाम के एक सोशल मीडिया उपयोगकर्ता ने कार्यक्रम में पुलिस के कथित आचरण की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि आरोपियों को पकड़ने के बजाय पुलिसकर्मियों को नृत्य का आनंद लेते हुए देखा जा सकता है। एक अन्य उपयोगकर्ता ने कहा कि वाराणसी और आसपास के इलाकों में, यहां तक कि ग्रामीण इलाकों में भी 10 साल पहले इस तरह के अश्लील नृत्य नहीं होते थे। पता नहीं एक दशक में संस्कृति का स्तर इतना कैसे गिर गया।

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