Edited By Anil Kapoor,Updated: 30 Sep, 2026 06:34 AM

ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के चर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले सौरभ राजपूत हत्याकांड में आज, यानी बुधवार (30 सितंबर) को जिला जज की अदालत अपना फैसला सुना सकती है। अदालत में सबसे पहले यह तय किया जाएगा कि मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की निर्मम हत्या...
Meerut News: ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के चर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले सौरभ राजपूत हत्याकांड में आज, यानी बुधवार (30 सितंबर) को जिला जज की अदालत अपना फैसला सुना सकती है। अदालत में सबसे पहले यह तय किया जाएगा कि मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की निर्मम हत्या के आरोपी मुस्कान और साहिल दोषी हैं या नहीं। यदि अदालत दोनों को दोषी ठहराती है, तो इसके तुरंत बाद सजा के बिंदु पर बहस और सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होगी। मामले में गत 17 सितंबर को ही अभियोजन और बचाव पक्ष की अंतिम बहस पूरी हो चुकी थी। अभियोजन पक्ष ने घटना की कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को आधार बनाते हुए अदालत से दोनों आरोपियों के लिए फांसी यानी मृत्युदंड की मांग की है।
सुनवाई के दौरान सरकारी वकील और वादी पक्ष के अधिवक्ता विजय बहादुर ने अदालत के सामने तर्क रखा कि यह महज एक अपराध नहीं, बल्कि ठंडे दिमाग से रची गई एक खौफनाक साजिश थी। अभियोजन ने साबित करने की कोशिश की है कि हत्या से पहले नशीली दवाइयों और चाकू का बंदोबस्त किया गया था। सौरभ की हत्या करने के बाद उसके शव को छुपाने के लिए आरोपियों ने नीले रंग का प्लास्टिक ड्रम, सीमेंट और रेत खरीदी। योजना यह थी कि शव को ड्रम में डालकर ऊपर से सीमेंट से पूरी तरह सील कर दिया जाए और फिर उसे कहीं दूर ले जाकर ठिकाने लगा दिया जाए। हालांकि, इस खौफनाक साजिश को अंजाम तक पहुंचाने से पहले ही मामला उजागर हो गया और पुलिस ने आरोपियों को धर दबोचा।
अधिवक्ता विजय बहादुर ने बताया कि पीड़ित परिवार और अभियोजन की ओर से अदालत में कुल 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। इनमें सौरभ के भाई बबलू, उसकी मां और करीबी दोस्त के अलावा वे दुकानदार भी शामिल हैं जिनसे आरोपियों ने नीला ड्रम, सीमेंट, रेत, नशीली दवाएं और चाकू खरीदा था। इसके अलावा हत्या के बाद आरोपी जिन जगहों पर घूमने गए थे, वहां से जुड़े अहम सबूत और डिजिटल साक्ष्य भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं। दूसरी ओर, मुस्कान की पैरवी कर रही अधिवक्ता रेखा जैन और बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत में सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अपने मुवक्किलों को निर्दोष बताया है।
अभियोजन पक्ष का कहना है कि यह मामला रेअरेस्ट ऑफ रेयर (दुर्लभ से दुर्लभतम) की श्रेणी में आता है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व के फैसलों का नजीर के तौर पर हवाला देते हुए कहा कि कानून में इस अपराध के लिए न्यूनतम सजा आजीवन कारावास और अधिकतम मृत्युदंड है, और जिस क्रूरता से इस वारदात को अंजाम दिया गया, उसे देखते हुए दोनों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। वहीं, मुस्कान की बेटी के डीएनए टेस्ट से जुड़े सवाल पर अधिवक्ता विजय बहादुर ने स्पष्ट किया कि फिलहाल मूल मामला सौरभ की हत्या के ट्रायल का है, इसलिए इस मोड़ पर ऐसी किसी मांग से ट्रायल प्रभावित हो सकता है। बच्ची के भविष्य या सहानुभूति के पहलू पर फैसला अदालत के क्षेत्राधिकार में है।
चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में बंद दोनों आरोपियों की गतिविधियों पर भी सबकी नजर है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा के अनुसार, मुस्कान जेल में अपना ज्यादातर समय धार्मिक गतिविधियों में बिता रही है। वह अपनी बच्ची की देखभाल के साथ-साथ सुबह-शाम नियम से संध्या आरती, सुंदरकांड का पाठ और शिव पूजा कर रही है। वहीं, दूसरा आरोपी साहिल जेल में काफी शांत रहता है और अन्य बंदियों से ज्यादा बातचीत न करके अपने कामों में ही लगा रहता है। आज जब मेरठ की अदालत का फैसला आएगा, तो देखना होगा कि सौरभ के परिवार को न्याय मिलता है या कानूनी दांव-पेच में मामले की राह कुछ और होती है। पूरे शहर की नजरें आज अदालत परिसर पर टिकी हुई हैं।