न सात फेरे लिए, न भरी मांग… झांसी में CM सामूहिक विवाह में भ्रष्टाचार का खेला, कई शादीशुदा जोड़े भी मिले लाभार्थी

Edited By Mamta Yadav,Updated: 08 Nov, 2025 04:55 PM

neither did they take seven vows nor did they fulfill their vows corruption pla

उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के गुरसराय ब्लॉक में आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत हुए एक समारोह में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। इस आयोजन में कुल 123 जोड़ों की शादी हुई बताई गई, लेकिन जांच में यह पता चला कि इनमें से कई...

Jhansi News: उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के गुरसराय ब्लॉक में आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत हुए एक समारोह में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। इस आयोजन में कुल 123 जोड़ों की शादी हुई बताई गई, लेकिन जांच में यह पता चला कि इनमें से कई शादियाँ केवल फॉर्म-फिलिंग की गई थीं, और असलियत में आवेदनकर्ता पात्र नहीं थे।

CM सामूहिक विवाह में भ्रष्टाचार का खेला
आवेदन प्रक्रिया ऐसी थी कि लाभार्थी ऑनलाइन फॉर्म भरते थे, जो सीधे ग्राम विकास अधिकारी (VDO) और सहायक विकास अधिकारी (समाज कल्याण) तक पहुँचते थे। इन अधिकारियों पर दस्तावेजों की मैदानी सत्यापन (Field Verification) की जिम्मेदारी थी पर यहाँ पर लापरवाही की शुरुआत होती दिखी। जांच में पाया गया कि न तो सत्यापन के दौरान विजिट हुई, न ही आवेदनकर्ता वास्तविक रूप से निरीक्षण के दायरे में आए; सिर्फ फाइलों में टिक मार्क लगा दिए गए थे।

कई शादीशुदा जोड़े भी लाभार्थी मिले
इसके पश्चात् ये फाइलें ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) तक पहुंचीं जहाँ भी क्रॉस-चेक का कोई ठोस तरीका अपनाया नहीं गया। अंततः समाज कल्याण विभाग तक पहुंचने वाली फाइलों को ‘स्वीकृत’ कर दिया गया, बिना किसी डबल चेक या सत्यापन के। इस प्रक्रिया के कारण काफी सारे ऐसे नाम लाभार्थियों की सूची में शामिल हो गए थे जिनकी शादी पहले ही हो चुकी थी, या जिनका आवेदन पात्र नहीं था। घोषित समारोह में, कई जोड़े मंडप से गायब हो गए और गिनती के दौरान यह आख़िरी पाया गया कि कुछ नामों के दूल्हा-दुल्हन वास्तव में मौजूद ही नहीं थे। ऐसी खुलासे के बाद आरोप लगाए गए हैं कि “जो जितने जोड़े बढ़ेंगे, उतना बजट मिलेगा” की मानसिकता ने इस फर्जीवाड़े की जड़ में काम किया।

योजना का उद्देश्य तो गरीब-परिवारों की बेटियों को शादी कराने और उन्हें सामाजिक सुरक्षा देना था, पर इस मामले में वही व्यवस्था भ्रष्टाचार का हिस्सा बनी। अब यह देखना होगा कि सरकार इस खुलासे के बाद क्या कार्रवाई करती है और दोषियों को कितनी सख्ती से दंडित करती है।

 

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