चार बार फेल, फिर भी नहीं मानी हार, पढ़ें IAS बनीं तृप्ति कलहंस की Success Story

Edited By Ramkesh,Updated: 16 Jan, 2026 07:26 PM

failed four times still did not accept defeat read the success story of tripti

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की रहने वाली आईएएस अधिकारी तृप्ति कलहंस की सफलता की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो खुद को औसत मानकर बड़े सपनों से पीछे हट जाते हैं। स्कूल की पिछली बेंच से लेकर देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा तक का उनका सफर...

गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की रहने वाली आईएएस अधिकारी तृप्ति कलहंस की सफलता की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो खुद को औसत मानकर बड़े सपनों से पीछे हट जाते हैं। स्कूल की पिछली बेंच से लेकर देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा तक का उनका सफर यह साबित करता है कि सफलता का रास्ता केवल टॉपर्स के लिए नहीं होता।

गोंडा से की 12वीं की पढ़ाई
तृप्ति कलहंस ने फातिमा सीनियर सेकेंडरी स्कूल, गोंडा से 12वीं की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के कमला नेहरू कॉलेज से बीकॉम की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के दौरान वे कभी क्लास की मेधावी छात्रा नहीं रहीं। खुद को ‘बैकबेंचर’ बताने वाली तृप्ति का कहना है कि औसत छात्र होने का फायदा यह होता है कि गिरने का डर कम और आगे बढ़ने की जिद ज्यादा होती है।

लगातार चार बार असफलता
यूपीएससी की तैयारी के दौरान तृप्ति को लगातार चार बार असफलता का सामना करना पड़ा। रिश्तेदारों के ताने, सामाजिक दबाव और खुद पर उठते सवालों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। हर असफल प्रयास के बाद उन्होंने अपनी रणनीति पर दोबारा काम किया और यह समझा कि दूसरों की नकल करने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार तैयारी करना जरूरी है।

सोशल मीडिया से दूरी बनाकर 
उन्होंने लंबी पढ़ाई के घंटों के बजाय गुणवत्ता पर जोर दिया। कठिन विषयों को रटने के बजाय उन्हें सरल भाषा में समझने की कोशिश की और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर पूरा ध्यान लक्ष्य पर केंद्रित रखा।

ऑल इंडिया 199 रैंक हासिल की
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2023 में तृप्ति कलहंस ने ऑल इंडिया रैंक 199 हासिल कर आईएएस बनने का सपना पूरा किया। इंटरव्यू के दौरान उनकी सादगी, ईमानदारी और संघर्ष भरे अनुभवों ने चयन बोर्ड को प्रभावित किया। आज तृप्ति कलहंस उन युवाओं के लिए उम्मीद की मिसाल हैं, जो यह मानते हैं कि मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के आगे औसत प्रदर्शन भी बड़ी कामयाबी में बदल सकता है।
 

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