Edited By Mamta Yadav,Updated: 28 Sep, 2025 10:38 PM

उत्तर प्रदेश के कानपुर से शुरू हुए "I Love मोहम्मद" विवाद की आग अब देश के कई राज्यों में फैल चुकी है। इसी बहस के बीच अब कांग्रेस ने भी राजनीतिक दखल दे दिया है। लखनऊ स्थित कांग्रेस कार्यालय के बाहर "I Love Constitution" लिखे होर्डिंग्स लगाए गए हैं,...
Lucknow News: उत्तर प्रदेश के कानपुर से शुरू हुए "I Love मोहम्मद" विवाद की आग अब देश के कई राज्यों में फैल चुकी है। इसी बहस के बीच अब कांग्रेस ने भी राजनीतिक दखल दे दिया है। लखनऊ स्थित कांग्रेस कार्यालय के बाहर "I Love Constitution" लिखे होर्डिंग्स लगाए गए हैं, जिनमें राहुल गांधी समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं की तस्वीरें नजर आ रही हैं। कांग्रेस नेता अब्दुल्ला शेरखान द्वारा लगाए गए इन पोस्टरों को सीधे तौर पर "I Love मोहम्मद" अभियान के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब सोशल मीडिया पर धार्मिक भावनाओं से जुड़े कई ट्रेंड्स वायरल हो रहे हैं।
"I Love" ट्रेंड के सियासी रंग
दरअसल, "I Love मोहम्मद" का ट्रेंड तब शुरू हुआ जब कानपुर के रावतपुर इलाके में बारावफात के मौके पर एक जुलूस के दौरान "I Love मोहम्मद" लिखा एक लाइट बोर्ड लगाया गया। ईद मिलाद-उन-नबी के मौके पर लगाए गए इस बोर्ड को लेकर विवाद खड़ा हो गया। इसके बाद I Love Mahadev, I Love Ram, और I Love Mahakal जैसे जवाबी ट्रेंड सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने लगे। हिंदू संगठनों ने इसे "नई परंपरा" कहकर विरोध जताया और आरोप लगाया कि ऐसे बैनर लगाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश हो रही है। वहीं मुस्लिम समुदाय का कहना है कि "I Love मोहम्मद" उनके धार्मिक विश्वास का प्रतीक है और इसमें कोई आपत्तिजनक बात नहीं है।
देशभर में पहुंचा विवाद
कानपुर से शुरू हुए इस विवाद की लपटें अब महाराष्ट्र, उत्तराखंड, तेलंगाना और गुजरात तक पहुंच गई हैं। कई जगहों पर I Love मोहम्मद के समर्थन और विरोध में प्रदर्शन हुए। उन्नाव में तो नारेबाजी भी हुई जिसमें विवादास्पद नारे लगाए गए। इन सबके बीच कांग्रेस की एंट्री ने इस पूरे घटनाक्रम को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। "I Love Constitution" के नारे के साथ कांग्रेस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह संविधान और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की पक्षधर है।