'भारतीय समाज अपनी परंपरा और संस्कृति का सम्मान करना जानता है', भारतेंदु नाट्य अकादमी के 50 वर्ष पूरे होने पर बोले CM Yogi

Edited By Purnima Singh,Updated: 05 Apr, 2026 02:31 PM

cm yogi on bna foundation day

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि भारतीय समाज अपनी परंपरा, अपनी संस्कृति और अपनी विरासत को सम्मान देना जानता है। योगी आदित्यनाथ ने यहां भारतेंदु नाट्य अकादमी (बीएनए) की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में...

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि भारतीय समाज अपनी परंपरा, अपनी संस्कृति और अपनी विरासत को सम्मान देना जानता है। योगी आदित्यनाथ ने यहां भारतेंदु नाट्य अकादमी (बीएनए) की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य 'स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह' की शुरुआत की जो 12 अप्रैल तक जारी रहेगा। इस मौके पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा, "आज रंगमंच अच्छा प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा है तो समाज भी उस अच्छाई को उसी रूप में स्वीकार कर रहा है।" 

'रामायण' दुनिया का सबसे लोकप्रिय धारावाहिक- सीएम योगी  
योगी ने कहा, "समाज में अच्छाई को देखना है तो हमें यह भी देखना होगा कि अब तक दुनिया का सबसे लोकप्रिय धारावाहिक 'रामायण' रहा है। यह भारतीय समाज है, जो अपनी परंपरा, अपनी संस्कृति और अपनी विरासत को सम्मान देना जानता है।" उन्होंने प.बंगाल के अकाल पर आधारित बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय कृत 'आनंद मठ' से प्रेरित एक नाट्य प्रस्तुति देखने के बाद उसकी सराहना की और कहा, "वंदे मातरम् की प्रस्तुति हर जिले में आयोजित की जानी चाहिए। यह प्रस्तुति 15 मिनट की नहीं, बल्कि दो घंटे की होनी चाहिए।" उन्होंने कहा, "मंचन के दौरान लोगों को उस त्रासदी का एहसास कराना आवश्यक है।'' 

'रंगमंच समाज का दर्पण होता है'
मुख्यमंत्री ने कहा, ''हम अपने नागरिकों को सम्मान देने में परहेज करते हैं। पहले गुंडों और खलनायकों को नायक के रूप में प्रस्तुत किया जाता था। समाज के खलनायकों को प्रस्तुत करने का परिणाम यह हुआ कि समाज में उसी प्रकार के चरित्र सामने आए।" अकादमी की 50 वर्ष की यात्रा पर बधाई देते हुए योगी ने कहा, "हम बचपन से सुनते आए हैं कि रंगमंच समाज का दर्पण होता है और वही समाज की दिशा तय करता है।" उन्होंने कहा, "रंगमंच वह स्थान है, जहां भावनाएं शब्द बनती हैं, शब्द अभिनय में बदलते हैं और वही अभिनय जनचेतना बनकर समाज को नयी दिशा देता है, जैसा कि 'आनंद मठ' के 'वंदे मातरम्' गीत के माध्यम से देखा जा सकता है।" 
 

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