विकास के दावे हुए फेल, योगी सरकार को आईना दिखाता मसौनी प्राथमिक विद्यालय

Edited By Ramkesh, Updated: 29 Jul, 2022 05:24 PM

claims of development failed masauni primary school showing mirror to yogi

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भले ही परिषदीय विद्यालय के कायाकल्प योजना के तहत बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए कटिबद्ध है। लेकिन प्रदेश में कुछ ऐसे भी प्राथमिक विद्यालय है जहां पर विद्यालय जाने के लिए रास्ता ही नहीं है। जिससे बच्चे पानी भरे हुए...

चंदौली: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भले ही परिषदीय विद्यालय के कायाकल्प योजना के तहत बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए कटिबद्ध है। लेकिन प्रदेश में कुछ ऐसे भी प्राथमिक विद्यालय है जहां पर विद्यालय जाने के लिए रास्ता ही नहीं है। जिससे बच्चे पानी भरे हुए खेतों से होकर जाते है। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।  वहीं जब इस मामले में स्थानीय लोगों से इस मामले में बात की गई।  बारिश के मौसम में घुटनों तक कीचड़ से हो कर विद्यालय पहुंचते हैं। इस दौरान कई बार शिक्षक और बच्चे घायल भी हो गए और आए दिन कीचड़ में बच्चे गिरते रहते हैं । लेकिन विद्यालय निर्माण के 25 साल बीत जाने के बाद भी विद्यालय के लिए रास्ता मुहैया नहीं हो पाया । यह हाल जिला मुख्यालय से सटे विद्यालय का है जहां पर इस विकट परिस्थिति में बच्चों को पढ़ने विद्यालय जाना पड़ता है । सबसे बड़ा खतरा बच्चों को जहरीले जन्तुओ से है । यही नहीं छात्रों के और शिक्षकों को कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है।

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1997 में प्राथमिक विद्यालय का हुआ निर्माण, फिर भी रास्ते का नहीं हो सकता निमार्ण
 जिले के सदर ब्लाक के मसौनी गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय का है। यहां पर 1997 में प्राथमिक विद्यालय का निर्माण तो करा दिया गया लेकिन विद्यालय निर्माण के दौरान इस बात का ध्यान ही नहीं रखा गया कि विद्यालय के लिए सड़क मार्ग कहां है और बच्चे हो या शिक्षक हो इस विद्यालय पर कैसे आएंगे जाएंगे।  विद्यालय के चारों तरफ ग्रामीणों की जमीन है । जिन्होंने अपने खेतों से रास्ता देने से इनकार कर दिया है। गर्मी और जाड़े में तो बच्चे आराम से खेतों के पगडंडियों से विद्यालय चले जाते हैं। लेकिन बारिश के 3 से 4 महीने में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बावजूंद इसके कई सरकारें आई और गई लेकिन इस विद्यालय को अब तक जाने का रास्ता नहीं मिल पाया। बताया जा राह है कि राजनीति की भेंट यह विद्यालय चढ़ गया और इसका खामियाजा बच्चों और शिक्षकों को उठाना पड़ रहा हैं । जो आए दिन इस कीचड़ में गिरकर घायल हो रहे हैं। लेकिन इनकी इस परेशानी को हल करने वाला कोई नहीं है।

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शिक्षकों का आरोप अधिकारियों से रास्ते के लिए की बात फिर समस्या का नहीं हुआ निदान 
विद्यालय में पढ़ा रहे शिक्षकों का कहना है कि 1997 में विद्यालय निर्माण के बाद से ही रास्ते की व्यवस्था नहीं की गई ।जिसके कारण शिक्षक और बच्चों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है ।खुद शिक्षिकाएं कई बार गिरकर चोटिल हो चुकी है। लेकिन बार-बार शिकायत के बाद भी नही शिक्षा विभाग के आला अधिकारी, जिला प्रशासन और ना ही जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस तरफ गया । स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों ने बताया कि उन्हें कीचड़ के बीच से आना जाना पड़ता है प्रतिदिन उनके कपड़े गंदे हो जाते हैं कई कई बच्चे कीचड़ में गिर जाते हैं उन्हें चोट आ जाती है और उनके पुस्तकें भी खराब हो जाती है अगर रास्ता होता तो आराम से विद्यालय आते जाते ।  ग्रामीणों का कहना है विद्यालय के चारों तरफ कृषि योग्य भूमि है और जिनकी जमीन है वह रास्ता देने को तैयार नहीं है इस कारण बच्चों को उन्हें कीचड़ भरे गड्ढों से होकर खेतों से होकर पढ़ने जाने को मजबूर होना पड़ता है इस कीचड़ में गिरकर बच्चे और शिक्षक घायल भी हो चुके हैं। कई अभिभावकों ने इस दुर्घटना के कारण बच्चों का नाम से विद्यालय से कटवा कर कहीं और एडमिशन करा दिया है।

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खंड शिक्षा अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने दिया ये जवाब
वही खंड शिक्षा अधिकारी सदर सुरेंद्र सिंह ने बताया के विद्यालय निर्माण के बाद से ही यह परेशानी है अधिकारियों को जब विद्यालय जाना पड़ता तो वह भी विद्यालय नहीं पहुंच पाते गर्मी का मौसम होता है तो सुविधा होती है लेकिन बारिश में चारों तरफ कीचड़ होता है जिसके कारण इस कीचड़ के बीच से ही बच्चों को पढ़ने और शिक्षकों को पढ़ाने जाना पड़ता है हालांकि ग्राम प्रधान से इस संबंध में बात की गई है तो बहुत जल्द आने जाने के मार्ग की व्यवस्था हो जाएगी इसके लिए विद्यालय के आसपास जिनकी भी जमीन है उनसे भी बात की जा रही है बहुत जल्द ही इस समस्या का समाधान कर लिया जाएगा।  अब बड़ा सवाल ये है कि क्या जिला प्रशासन का इस ओर ध्यान देगा। यह फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। 

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