Chhath Puja Samagri List: पहली बार कर रहे हैं छठ व्रत? बिना इन चीजों के अधूरी है पूजा, यहां देखें सम्पूर्ण सामग्री सूची

Edited By Mamta Yadav,Updated: 22 Oct, 2025 02:48 PM

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Chhath Puja Samagri List: बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल सहित देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाने वाली छठ पूजा का शुभारंभ इस वर्ष 25 अक्टूबर 2025, शनिवार से होगा और समापन 28 अक्टूबर 2025, मंगलवार को प्रातः कालीन अर्घ्य के साथ...

Chhath Puja Samagri List: बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल सहित देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाने वाली छठ पूजा का शुभारंभ इस वर्ष 25 अक्टूबर 2025, शनिवार से होगा और समापन 28 अक्टूबर 2025, मंगलवार को प्रातः कालीन अर्घ्य के साथ होगा।

बिना इन चीजों के अधूरी है पूजा (Chhath Puja Samagri List)
बता दें कि चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व की शुरुआत ‘नहाय-खाय’ से होती है और अंतिम दिन सूर्य देव को अर्घ्य देने के साथ यह व्रत सम्पन्न होता है। व्रत रखने वाली महिलाएं सूर्य देव और छठी मइया से अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्ध भविष्य की कामना करती हैं। इस पावन अवसर पर पूजा सामग्री का विशेष महत्व होता है। यदि इनमें से कोई भी सामग्री अधूरी हो, तो पूजा को पूर्ण नहीं माना जाता। पहली बार छठ व्रत रखने वाले व्रतधारियों के लिए यहां प्रस्तुत है छठ पूजा 2025 की संपूर्ण सामग्री सूची।

छठ पूजा 2025 की संपूर्ण सामग्री सूची (Chhath Puja Samagri List)

  • नई साड़ी (सुहाग के वस्त्र)
  • बांस की दो बड़ी टोकरियां (सूप व डलिया)
  • गिलास, लोटा और थाली
  • चम्मच, कलावा, सिंदूर
  • 5 गन्ने (पत्तों सहित)
  • शकरकंदी, सुथनी, सिंघाड़ा
  • पान, सुपारी, हल्दी की गांठ
  • मूली और अदरक के हरे पौधे
  • डाभ (मीठा नारियल), शरीफा, केला, नाशपाती
  • मिठाई, गुड़, गेहूं, चावल
  • चावल का आटा (ठेकुआ बनाने हेतु)
  • ठेकुआ, दीपक, धूप, शहद, कुमकुम
  • पानी वाला नारियल


इन सामग्रियों के साथ भक्तजन विधिपूर्वक सूर्य देव और छठी मइया की आराधना करते हैं।
चार दिन का पर्व, चार खास चरण (Chhath Puja Samagri List)

  • नहाय खाय – पहले दिन व्रती शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं।
  • खरना – दूसरे दिन व्रती गुड़ की खीर और रोटी खाकर उपवास आरंभ करते हैं।
  • संध्या अर्घ्य – तीसरे दिन सूर्यास्त के समय अर्घ्य दिया जाता है।
  • प्रात: अर्घ्य – अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रत संपन्न होता है।

 

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